लखनऊ से बड़ी खबर है कि विवेक तिवारी हत्याकांड में दोषी सिपाही प्रशांत चौधरी को अदालत ने 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में करीब आठ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह फैसला आया है। विवेक तिवारी हत्याकांड की सजा ने इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विवेक तिवारी हत्याकांड की घटना का संक्षिप्त विवरण
29 सितंबर 2018 को लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार इलाके में यह घटना हुई थी। एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी सना खान को कार से घर छोड़ने जा रहे थे। तभी मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। कार न रुकने पर पुलिसकर्मियों ने पीछा किया और प्रशांत चौधरी की गोली लगने से विवेक तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
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इसके बाद विवेक तिवारी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार करते हुए निधन हो गया। इस घटना ने सामाजिक स्तर पर व्यापक आक्रोश फैलाया था।
अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया
लखनऊ की जिला एवं सत्र अदालत ने 17 सितंबर 2026 को प्रशांत चौधरी को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया। इसके बाद 21 सितंबर को सजा का ऐलान करते हुए उन्हें 10 साल की कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस मामले में दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों की कमी के कारण बरी कर दिया गया।
अदालत का यह निर्णय न्याय प्रक्रिया की लंबी अवधि को समाप्त करता है और मृतक के परिवार को न्याय की उम्मीद देता है।
प्रशांत चौधरी की गिरफ्तारी और जेल में बिताए गए वर्ष
प्रशांत चौधरी को घटना के बाद गिरफ्तार कर आठ साल से जेल में रखा गया था। इस दौरान मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ था। मामले में जांच-पड़ताल के बाद आरोप तय किए गए और अदालत में मुकदमा चला।
इस फैसले ने अपराध और पुलिस व्यवस्था पर सवाल भी खड़े किए। कई लोगों ने पुलिस सुधार की मांग की है ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित उच्च न्यायालय की सुनवाई
विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने इस फैसले पर असंतोष जताते हुए उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है। इस अपील से मामले की सुनवाई उच्च स्तर पर होगी और अदालत के फैसले की समीक्षा होगी।
इसके अलावा, यह अपील न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो किसी भी मामले में अंतिम निर्णय से पहले होता है। इसलिए इस मामले में भी कानूनी लड़ाई जारी रह सकती है।
विवेक तिवारी हत्याकांड की सजा से जुड़े निष्कर्ष
विवेक तिवारी हत्याकांड में दोषी सिपाही प्रशांत चौधरी को 10 साल की कैद की सजा सुनाने से यह संदेश जाता है कि कानून के सामने हर कोई बराबर है। यह फैसला समाज में न्याय की भावना को मजबूत करता है।
फिलहाल, इस सजा से पुलिस और आम जनता दोनों के लिए एक कड़ा उदाहरण स्थापित होगा। इसके साथ ही यह घटना पुलिस सुधार और जवाबदेही की दिशा में भी प्रेरणा बनेगी।



