अखिलेश यादव ने 1.27 करोड़ हिंदू वोटर लिस्ट से कैसे गायब होने का सवाल उठाया है। इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे पर सीधे चुनौती दी है।
योगी आदित्यनाथ ने वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदू वोटर गायब होने का दावा किया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में यह जानकारी दी कि प्रदेश की वोटर सूची से लगभग 1.27 करोड़ हिंदू मतदाता नाम गायब हैं। यह आंकड़ा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को विशेष रूप से उठाते हुए कहा कि यह कटौती विशेष रूप से हिंदू वोटरों की सूची से हुई है।
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अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के दावे पर सवाल उठाए
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस दावे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा कि उनके पास इस विशिष्ट आंकड़े की जानकारी कैसे आई कि गायब हुए 1.27 करोड़ वोटर केवल हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि यह सवाल वोटर लिस्ट से जुड़े प्रशासनिक प्रक्रिया और निष्पक्षता पर बड़ा संदेह दर्शाता है।
1.27 करोड़ वोटर कटने का विधानसभा चुनाव पर प्रभाव
अखिलेश यादव ने बताया कि यदि 1.27 करोड़ वोटर वोटर लिस्ट से कटे हैं, तो इसका असर विधानसभा चुनाव के हर क्षेत्र में होगा। औसतन, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 31,000 वोटों की कमी होगी, जो चुनाव के नतीजों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। इससे विपक्षी दलों को चुनावी रणनीति में भी बदलाव करना पड़ेगा।
चुनावी प्रक्रिया और फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने स्पेशल समरी रिवीजन (SIR/SSIR) और फॉर्म-7 के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के जरिए वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की कोशिशें हुईं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस तरह की गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच का आग्रह किया।
मतदाता सूची को आधार कार्ड से जोड़ने का सुझाव
फर्जी वोट कटने की समस्या से निपटने के लिए अखिलेश यादव ने मतदाता सूची को आधार कार्ड और बायोमेट्रिक डेटा से जोड़ने की पुरानी मांग को दोहराया। उनका मानना है कि इससे वोटर सूची की पारदर्शिता बढ़ेगी और वोट कटने की घटनाओं पर काबू पाया जा सकेगा। यह कदम चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगा।



