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सिंधु जल संधि पर फ़ारूक अब्दुल्लाह की भारत सरकार से अपील: “जम्मू-कश्मीर सबसे बड़ा पीड़ित”
नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक अब्दुल्लाह ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार से अहम अपील की है। उन्होंने कहा कि इस संधि से सबसे अधिक नुकसान जम्मू-कश्मीर को हुआ है, और इस मुद्दे पर अब केंद्र सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
संधि में जम्मू-कश्मीर को नहीं लिया गया शामिल
फ़ारूक अब्दुल्लाह ने आरोप लगाया कि जब सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, तब जम्मू-कश्मीर के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा,
“इस संधि के कारण सबसे ज़्यादा जिसे नुक़सान हुआ, वह जम्मू-कश्मीर को हुआ है।”
बिजलीघर और पानी पर निर्भरता का मुद्दा
उन्होंने कहा कि राज्य को आज भी जल संसाधनों के उपयोग के लिए पाकिस्तान की अनुमति की आवश्यकता होती है।
“हम कोई भी बिजली घर नहीं बना सकते जब तक उनकी (पाकिस्तान) इजाज़त नहीं आए। हम वहां से एक बाल्टी पानी नहीं निकाल सकते जब तक उनकी इजाज़त न हो,”
जम्मू को पानी की भारी कमी का सामना
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जम्मू, जो राज्य की शीतकालीन राजधानी है, पानी की भारी कमी से जूझ रहा है।
उन्होंने याद करते हुए कहा,
“मैंने अपनी पहली हुकूमत में कोशिश की थी कि वहां का पानी वहीं के लिए लाया जाए। हमने 200 करोड़ का प्रोग्राम बनाया था, मगर वह रुक गया।”
भारत सरकार से भावुक अपील
फ़ारूक अब्दुल्लाह ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा,
“आज वक़्त आ गया है, वो पानी थोड़ा सा जम्मू के लिए लाइए। हम प्यास से मर रहे हैं।”



