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सीमावर्ती क्षेत्रों में हथियार लाइसेंस देने के फैसले पर गौरव गोगोई की तीखी प्रतिक्रिया, कहा – “यह शासन नहीं, जंगल राज है”
कांग्रेस सांसद और असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने राज्य सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को हथियारों के लाइसेंस देने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अराजकता फैलाने वाला निर्णय करार दिया है।

सोशल मीडिया पर जताई आपत्ति
गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स र) पर लिखा मैं सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों को हथियार देने के मुख्यमंत्री के फैसले की कड़ी निंदा करता हूं। असम के लोगों को बंदूकें नहीं, रोज़गार, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहिए।“
बीजेपी-आरएसएस समर्थकों को लाभ पहुंचाने का आरोप
गोगोई ने इस फैसले को राजनीतिक बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस समर्थकों तथा स्थानीय आपराधिक गिरोहों को हथियार बांटने की साज़िश की जा रही है, बजाय इसके कि पुलिस और सीमा सुरक्षा बलों को मजबूत किया जाए।”
उन्होंने चेताया कि यह फैसला राज्य में व्यक्तिगत प्रतिशोध के आधार पर हिंसा और अपराध को बढ़ावा देगा।
“यह शासन नहीं, जंगल राज की ओर कदम”
गौरव गोगोई ने अपने बयान में लिखा यह कोई सुशासन नहीं है, बल्कि अराजकता और जंगल राज की ओर बढ़ने वाला खतरनाक कदम है। यह फैसला जनता की नहीं, बल्कि चुनावी चिंता का परिणाम है।”
असम सरकार की योजना क्या है?
इससे पहले 28 मई को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक घोषणा में कहा था कि असम के संवेदनशील और दूर-दराज इलाकों में रहने वाले मूल निवासियों को हथियारों के लाइसेंस देने की विशेष योजना शुरू की जा रही है।
सरमा ने कहा था कि इस योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में रहने वाले मूल निवासियों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस देने से पहले सख्त जांच-पड़ताल की जाएगी।
मुख्यमंत्री की इस योजना पर जहां राज्य सरकार का कहना है कि यह सुरक्षा के हित में है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक और खतरनाक कदम बता रहा है।



