गंगा को स्वच्छ, अविरल और पर्यावरणीय रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने गंगा बेसिन के 13 प्रमुख शहरों के लिए Urban River Management Plan (URMP) सफलतापूर्वक तैयार कर ली है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) और विश्व बैंक (World Bank) के सहयोग से संचालित की जा रही है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरी विकास और नदी संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि नदी का स्वास्थ्य बेहतर हो, बाढ़ के खतरे कम हों, प्रदूषण नियंत्रित किया जा सके और सतत विकास को बढ़ावा मिले।
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इस परियोजना के अंतर्गत ऋषिकेश, हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर, गोरखपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर, प्रयागराज, बक्सर, छपरा और गया जैसे महत्वपूर्ण शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों में कृत्रिम आर्द्र भूमि (Artificial Wetlands), जल निकासी तंत्र के पुनरुद्धार और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण जैसे अभिनव समाधान लागू किए गए हैं।
अयोध्या और कानपुर में चलाए गए सफल पायलट प्रोजेक्ट्स से उत्साहित होकर अब इस मॉडल को गंगा तट के सभी 97 शहरों तक विस्तारित करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 27 शहरों के लिए विस्तृत योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें से 12 अतिरिक्त शहरों का कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
यह परियोजना पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। कानपुर में उन्नत झील मूल्यांकन और जल संसाधन प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग यह दर्शाता है कि नदी-संवेदनशील शहरी नियोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नई गति दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह गंगा और उससे जुड़े शहरों के लिए एक दीर्घकालिक परिवर्तनकारी पहल साबित हो सकती है।
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क्या गंगा की तरह भारत की अन्य प्रमुख नदियों—यमुना, गोदावरी, नर्मदा और कावेरी—के लिए भी इसी प्रकार की नदी-केंद्रित शहरी विकास योजनाएं लागू की जानी चाहिए?
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