दिल्ली पुलिस ने हाल ही में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रदर्शन के दौरान कानून और नियमों का पालन नहीं किया। यह बयान दिल्ली पुलिस की ज्वाइंट कमिश्नर नूपुर प्रसाद और डीसीपी/पीआरओ नेहा यादव ने दिया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने CJP के प्रदर्शन को लेकर अपने कड़े रुख को जाहिर किया।
दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रदर्शन पर कानून न मानने को बताया मुख्य कारण
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस ने कहा कि CJP ने प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार प्रदर्शन आयोजित करने के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक होता है, लेकिन CJP ने 7 अक्टूबर 2026 को अचानक आवेदन दिया। इस कारण पुलिस को सुरक्षा इंतजाम करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। यही वजह है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।
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पुलिस ने यह भी बताया कि पिछले प्रदर्शन के दौरान CJP ने पुलिस के निर्देशों की अवहेलना की थी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हुई। यह भी एक कारण था कि इस बार कड़ी कार्रवाई की गई।

CJP नेताओं की रिहाई और शर्तें
दिल्ली की एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 11 अक्टूबर 2026 को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, को-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा किया। रिहाई के दौरान तीनों नेताओं को 50,000 रुपये का मुचलका भरना पड़ा और एक वर्ष तक शांति बनाए रखने की शर्त लगाई गई। इस सशर्त रिहाई से यह स्पष्ट हो गया कि अदालत ने प्रदर्शन के दौरान कानून का उल्लंघन रोकने पर जोर दिया है।
रिहाई के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है जिसमें प्रदर्शन बंद करने की शर्त हो। उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प भी जताया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और दिल्ली में लागू BNSS की धारा 163
11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने दिल्ली में मेट्रो सेवाओं, इंटरनेट और नागरिकों की आवाजाही बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अवैध हिरासत न करने और कानून के तहत कार्रवाई करने पर जोर दिया।
इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। इस धारा के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

प्रदर्शन के दौरान और बाद की पुलिस कार्रवाई
10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने लगभग 2,500 से 3,000 प्रदर्शनकारियों को निरोधात्मक हिरासत में लिया। इसके अलावा, पुलिस ने पुलिसकर्मियों से हुई हाथापाई और तोड़फोड़ के आरोप में 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। ये एफआईआर मारपीट, पथराव और धारा 163 के उल्लंघन के मामलों में की गई हैं।
पुलिस द्वारा जारी किए गए वीडियो में दिखाया गया है कि अभिजीत दीपके की दादी के निधन के दौरान पुलिस ने उनकी मदद की कोशिश की और यात्रा की सुविधा देने की पेशकश की।
प्रदर्शन का आम आदमी पर प्रभाव और आगे की संभावना
दिल्ली में प्रदर्शन के कारण मेट्रो सेवाएं बंद रहीं और इंटरनेट सेवा प्रभावित हुई। इससे आम नागरिकों की आवाजाही और दैनिक जीवन पर असर पड़ा। सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों ने लोगों को असुविधा में डाल दिया है।
आगे की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है कि CJP प्रदर्शन जारी रखेगा या नहीं। कोर्ट और पुलिस की निगरानी के बीच प्रदर्शन की प्रकृति और कड़ी हो सकती है। इससे राजधानी की कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ संदेश
दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि CJP ने कानून का पालन नहीं किया। पुलिस ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार और पुलिस प्रशासन प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क हैं। भविष्य में ऐसे प्रदर्शन के लिए नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक होगा।



