हरिद्वार। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शनिवार को योगगुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 फीसदी तक घोटाला होता है। रामदेव ने आरोप लगाया कि कई जगह जाति, वर्ग, संगठन या व्यक्तिगत सिफारिश के आधार पर लोगों को फायदा पहुंचाया जाता है, जबकि योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया जाता है।
बाबा रामदेव ने यह बयान ध्वजारोहण के बाद मीडिया से बातचीत में दिया। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कथित रिश्वतखोरी और पक्षपात पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो देश में युवाओं के आंदोलन और बढ़ सकते हैं। उन्होंने खुद भी दोबारा आंदोलन करने की संभावना को लेकर चेतावनी दी, हालांकि साथ ही स्पष्ट किया कि वह अराजकता के समर्थक नहीं हैं।
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इंटरव्यू में 90 से 99% तक घोटाला
बाबा रामदेव ने दावा किया कि जब नौकरी की बारी आए खासकर सरकारी जॉब में तो इंटरव्यू के दौरान खासकर 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। अपने विचार, अपने संगठन और अपने जाति वर्ग के लोगों को नौकरी देने का काम होता है। बाकी लोगों को धक्का मार देते हैं। यह बहुत ही अपमानजनक है। ये लोकतंत्र के खिलाफ और न्याय के भी खिलाफ है। अब सरकारी नौकरियों में 50 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये लेकर भर्ती का खेल चल रहा है।
देश में और ज्यादा होंगे आंदोलन
बाबा रामदेव ने कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश में फिर बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। बाबा रामदेव ने कहा कि देश में कई जगहों पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे तक शिकायत कर रहे हैं कि कहीं शिक्षक नहीं हैं, कहीं पानी और शौचालय की सुविधा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई जगह किताबें हैं तो शिक्षक नहीं हैं और कहीं शिक्षक हैं तो संसाधनों की कमी है। बाबा रामदेव ने कहा कि अब ऐसे ही आंदोलन करना पड़ा तो देश कैसे चलेगा। इसलिए भाई, सुधर जाओ। आंदोलन देश में और ज्यादा भी हो सकते हैं। आंदोलन के नाम पर मैं अराजकता का समर्थक नहीं हूं, लेकिन ये बात जरूर है कि देश में घपला भी बहुत है। ये घपले ठीक कर लो, कहीं ऐसा न हो कि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन करना पड़े।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर उठाए सवाल
योग गुरु ने कहा कि देश में नकल और पेपर लीक जैसी समस्याएं भी चिंता का विषय हैं. उन्होंने कहा कि कई बार 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के बाद छात्रों को पता चलता है कि नंबरों में गड़बड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, शिक्षक और मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए. शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तभी देश आगे बढ़ेगा.
युवाओं के गुस्से और आंदोलनों का जिक्र
बाबा रामदेव ने अपने बयान को देश में युवाओं के बीच चल रहे असंतोष और आंदोलनों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि युवाओं में गुस्सा है और जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं। उनके मुताबिक, यदि भर्ती और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को समय रहते ठीक नहीं किया गया तो विरोध और बढ़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और रोजगार को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी कई राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनी हुई है।
स्कूल-कॉलेजों की व्यवस्था पर भी सवाल
सरकारी नौकरी की भर्ती के साथ रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में कहीं शिक्षकों की कमी है, तो कहीं बिजली, पानी, किताबों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की समस्या है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर देश की युवा पीढ़ी को मजबूत बनाना है तो केवल सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को सुधारना पर्याप्त नहीं होगा। स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं तक पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है।
राजनीतिक दलों को भी दिया संदेश
बाबा रामदेव ने अपने बयान में राजनीतिक दलों से भी आपसी टकराव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को देशहित में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को दुश्मनी में बदलने से बचने की बात कही। उन्होंने जाति, वर्ग और समुदाय के नाम पर विभाजन तथा नफरत से बचने की भी अपील की और देश में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया।



