इंदौर के 50 से अधिक बोरिंग में हानिकारक ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने की खबर ने शहर में पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संदर्भ में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इंदौर नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
एनजीटी ने इंदौर के बोरिंग में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि पर स्वतः संज्ञान लिया
हाल ही में इंदौर के विभिन्न आवासीय कॉलोनियों, सरकारी अस्पतालों और निजी छात्रावासों के 50 से अधिक बोरवेल के पानी के नमूनों में ई-कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए। इस मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), भोपाल सेंट्रल जोन बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में मिली गंभीर गड़बड़ी
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए 52 पानी के नमूनों की जांच में 50 में टोटल कोलीफॉर्म और 40 में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए गए। यह रिपोर्ट साफ दर्शाती है कि शहर के भूजल स्रोतों में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक है। इस प्रकार का बैक्टीरियल संक्रमण पीने के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डालता है।
सीवेज रिसाव को बताया गया संक्रमण का मुख्य कारण
जांच में यह भी सामने आया है कि सीवेज नेटवर्क और सेप्टिक टैंकों से गंदे पानी का रिसाव सीधे तौर पर बोरवेल के पानी में मिल रहा है। इसके कारण संक्रमण फैल रहा है। इससे साफ होता है कि जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन में गड़बड़ी से आम जनता की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है।
एनजीटी ने इंदौर नगर निगम को दिए कड़े निर्देश
एनजीटी ने प्रभावित बोरिंगों की तत्काल जांच और पानी के शोधन के कड़े निर्देश इंदौर नगर निगम को जारी किए हैं। साथ ही, भूजल संरक्षण के लिए निजी बोरिंगों पर प्रतिबंध लगाने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। नगर निगम को रियल-टाइम पानी की शुद्धता रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने का निर्देश मिला है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण 36 मौतों के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित किया था। आयोग की रिपोर्ट में जल आपूर्ति व्यवस्था में रखरखाव की कमी और प्रशासनिक लापरवाही को संस्थागत विफलता करार दिया गया है। यह रिपोर्ट जल आपूर्ति सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
आम जनता के लिए खतरा और आगे की संभावित कार्रवाई
हानिकारक ई-कोलाई बैक्टीरिया से संक्रमित पानी पीने से आम लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। इसलिए नगर निगम और संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से संक्रमण रोकने के उपाय करने होंगे। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में पानी का उपयोग सावधानी से करना चाहिए और जल शोधन के उपायों को प्राथमिकता देनी चाहिए।



