बालाघाट में करंट जाल में फंसा 12 साल का बाघ मृत पाया गया है। यह घटना उत्तर सामान्य वन मंडल के पूर्व बैहर सामान्य वन परिक्षेत्र की खुरमुंडी बीट में शनिवार को सामने आई। वन विभाग ने प्रारंभिक जांच में बाघ की मौत बिजली के करंट से होने की आशंका जताई है।
घटनास्थल और बाघ की पहचान
7 नवंबर 2026 को जंगल में गश्त करते समय बीट गार्ड को कक्ष क्रमांक 1582 में बाघ का शव मिला। यह 12 वर्षीय नर बाघ था। शव की पहचान और घटनास्थल पर मिले सबूतों के आधार पर वन विभाग ने मामले की गंभीरता को समझा। बाघ के आसपास लोहे के तार और खूंटियां बरामद हुईं, जो करंट जाल होने का संकेत हैं।
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बाघ की मौत का कारण और जांच
प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बाघ की मौत बिजली के करंट लगने से हुई है। इस संदर्भ में मुख्य आशंका है कि शिकारियों या ग्रामीणों ने जंगली सूअर को पकड़ने के लिए अवैध करंट जाल बिछाया था। वहीं, वन विभाग ने तीन डॉक्टरों की टीम के साथ बाघ के विसरा एकत्रित किए हैं, जिससे मौत के सटीक कारणों की पुष्टि की जाएगी।
वन विभाग की कार्रवाई और संदिग्धों की हिरासत
मुख्य वन संरक्षक गौरव चौधरी और वन मंडल अधिकारी रेशम सिंह धुर्वे के नेतृत्व में डॉग स्क्वॉड की मदद से दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ जारी है। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
परिस्थितियों का वन्य जीवन पर प्रभाव
बालाघाट क्षेत्र कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कोर और बफर जोन से लगा हुआ है, जहां वन्यजीवों की संख्या अच्छी है। करंट जाल जैसी अवैध गतिविधियाँ वन्यजीवों के लिए खतरा हैं। पिछले कुछ समय में बाघ और तेंदुए समेत कई वन्य जीवों की मौत हो चुकी है, जो इस क्षेत्र के जैव विविधता के लिए चिंता का विषय है।
आगे की संभावित कार्रवाई और संरक्षण प्रयास
वन विभाग ने मृत बाघ का नियमानुसार अंतिम संस्कार किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि होगी। इसके अलावा, वन विभाग शिकारियों पर कड़ी नजर रखेगा और अवैध करंट जाल लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। यह घटना वन संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करती है।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव संरक्षण की भूमिका
स्थानीय ग्रामीणों को भी वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। अवैध जाल बिछाने से न केवल वन्यजीवों को नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ता है। वन विभाग और स्थानीय समुदायों के सहयोग से इस तरह की घटनाओं को कम किया जा सकता है।



