मुरैना में 19 महीने के चीते KNG-22 की हत्या मामले में मुख्य आरोपी भगवाना सिंह मोगिया की गिरफ्तारी से वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। इस घटना ने स्थानीय वन्यजीव संरक्षण की चिंताओं को और गहरा कर दिया था।
19 महीने के चीते KNG-22 की मौत का मामला
19 महीने का नर चीता KNG-22, जो मादा चीता निरवा का शावक था, 25 अक्टूबर 2026 को श्योपुर टेरिटोरियल फ़ॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 में गंभीर रूप से घायल पाया गया था। वन्यजीव ट्रैकिंग टीम ने इसे जंगल के मुरैना-श्योपुर सीमा क्षेत्र में देखा था।
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इसके बाद इसे जाबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ले जाया गया, जहां 27 अक्टूबर को उपचार के दौरान इसकी मृत्यु हो गई।

मुख्य आरोपी भगवाना सिंह मोगिया की गिरफ्तारी
मुरैना पुलिस और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) की संयुक्त कार्रवाई में भगवाना सिंह मोगिया को हिरासत में लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में चीते पर गोली चलाने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि यह घटना विजयपुर पूर्व रेंज की नितनमास बीट के जंगल में बालकदास बाबा मंदिर के पास हुई थी।
बताया गया है कि घटना के समय भगवाना सिंह अकेले नहीं थे, उनके साथ दो अन्य साथी भी मौजूद थे, जिनकी तलाश अभी जारी है।
हत्या में इस्तेमाल हुआ देसी भरमार बंदूक
चीते के शरीर से निकाले गए पांच छर्रे यह स्पष्ट करते हैं कि हत्या में देसी भरमार बंदूक का उपयोग हुआ। यह हथियार स्थानीय जंगलों में अक्सर शिकारियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
जांच टीम इस बंदूक की बरामदगी के लिए सक्रिय है ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

वन विभाग ने की कर्तव्य लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश वन विभाग ने सुरक्षा में चूक और कर्तव्य लापरवाही के आरोप में दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वन रक्षकों को निलंबित कर दिया है। इससे यह संदेश गया कि वन्यजीव सुरक्षा को लेकर कड़ा रवैया अपनाया जाएगा।
वन विभाग ने विशेष जांच टीम गठित कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
जांच जारी, फरार आरोपियों की तलाश में जुटी टीम
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी दो अन्य संदिग्ध अभी फरार हैं। वन विभाग और पुलिस उनकी पकड़ के लिए संयुक्त प्रयास कर रही हैं।
जांच टीम घटना में इस्तेमाल हथियार की खोज में भी लगी है, जिससे पूरी घटना का पर्दाफाश हो सके।
चीते की हत्या से वन्यजीव संरक्षण पर असर
19 महीने के चीते KNG-22 की हत्या से वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठे हैं। यह घटना वन्यजीवों की सुरक्षा में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है।
स्थानीय लोगों और वन अधिकारियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के प्रयास तेज होंगे ताकि ऐसी घटनाएं पुनः न हों।



