राजपाल यादव ने नहीं चुकाए 5 करोड़ रुपये, सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को कड़ी फटकार लगाई है। यह मामला चेक बाउंस से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने राजपाल यादव को निर्धारित समय तक भुगतान न करने पर सख्त टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 5 करोड़ रुपये जमा करने का दिया था आदेश
5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव से 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। यह आदेश अभिनेता के सात चेक बाउंस मामलों के संदर्भ में दिया गया था, जिनमें कुल बकाया करीब 7.5 करोड़ रुपये बताये गए हैं। कोर्ट ने पूर्व में राजपाल को जेल जाने से अंतरिम राहत देते हुए यह शर्त रखी थी।
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हालांकि, 5 अक्टूबर तक राजपाल यादव इस रकम को जमा नहीं करा पाए। उनके वकील ने सिर्फ 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पेश की, जो कोर्ट को असंतोषजनक लगा।

कोर्ट की कड़ी फटकार और नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान कहा, “इस अहंकार को सही जगह पर लाने की जरूरत है। आपकी जगह जेल में है।” कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर तीखी नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था।
राजपाल यादव के वकील ने बताया कि बैंक बंद रहने के कारण देरी हुई है, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि दो सप्ताह का समय पहले ही दिया जा चुका था।
मामले की पृष्ठभूमि और चेक बाउंस विवाद
यह विवाद साल 2010 से शुरू हुआ जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म “अता पता लापता” के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये उधार लिए थे। फिल्म के खराब प्रदर्शन के बाद रकम लौटाने को लेकर विवाद बढ़ा।
2012 में एक समझौते के तहत राजपाल यादव, उनकी पत्नी और कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये लौटाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद 2013 में दिए गए सात चेक बाउंस हो गए, जिनके आधार पर मुरली प्रोजेक्ट्स ने सात अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए।

दिल्ली हाई कोर्ट की सजा और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और छह महीने की सजा सुनाई। बाद में मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2026 में तीन-तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई।
राजपाल यादव ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें जेल जाने से अंतरिम राहत मिली थी, लेकिन 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी गई थी।
कोर्ट द्वारा अंतिम मौका और आगामी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 तक राजपाल यादव को भुगतान के लिए अंतिम मौका दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी आदेश का पालन नहीं हुआ तो याचिका खारिज हो सकती है और गिरफ्तारी आदेश जारी हो सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी, जिसमें कोर्ट इस बात पर फैसला लेगी कि राजपाल यादव ने भुगतान किया या नहीं।
चेक बाउंस मामलों का आम आदमी पर असर
चेक बाउंस के मामले आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये भुगतान प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़े हैं। जब उच्च प्रोफ़ाइल व्यक्ति जैसे राजपाल यादव भुगतान नहीं करते, तो इससे आम जनता की व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होता है।
इसके अलावा, ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया लंबी चलती है, जिससे शिकायतकर्ताओं को न्याय मिलने में देरी होती है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसा व्यवहार कम होगा।



