उज्जैन में शाही मस्जिद हटाने के विरोध में पथराव की घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के कारण शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान यह हिंसक संघर्ष हुआ।
सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने की कार्रवाई
उज्जैन में कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इस योजना के तहत शाही मस्जिद के प्रार्थना हॉल और मीनार के एक हिस्से को उज्जैन नगर निगम द्वारा हटाया जा रहा है। यह सड़क चौड़ीकरण सिंहस्थ 2028 के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
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हालांकि, मस्जिद के इस हिस्से को हटाने को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय में विरोध की भावना गहरी है।

28 सितंबर को विरोध के दौरान पथराव और पुलिस की प्रतिक्रिया
मस्जिद के हटाए जाने की कार्रवाई के विरोध में शनिवार और रविवार की रात से ही लोग जमा होने लगे थे। 28 सितंबर 2026 की सुबह, जब नगर निगम और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तो विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।
पुलिस ने इससे निपटने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। इस दौरान क्राइम ब्रांच की टीआई पुष्पा पांचाल भी घायल हुईं।
सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती और सुरक्षा उपाय
घटना के बाद उज्जैन के कंठाल चौराहा और गोपाल मंदिर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और स्पेशल टास्क फोर्स के 2,000 से 2,500 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा, पूरे संवेदनशील इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई है और निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह कदम आगे होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाए गए हैं।
मुस्लिम समाज में मतभेद और शांति की अपील
इस विवाद के बीच मुस्लिम समुदाय में भी दो अलग-अलग रुख देखने को मिले हैं। एक गुट सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रभावित हिस्से को हटाने के पक्ष में है, जबकि दूसरा इसका विरोध कर रहा है।
शहर के काजी खालिक उर रेहमान ने शांति बनाए रखने और तनाव न फैलाने की अपील की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है ताकि स्थिति और बिगड़े नहीं।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की भूमिका और कानूनी स्थिति
इंदौर हाईकोर्ट ने पहले इस सड़क चौड़ीकरण के विरोध में दायर याचिकाओं को जनहित में खारिज कर दिया था। इसी विषय से संबंधित मामले की सुनवाई 28 सितंबर 2026 को भी निर्धारित थी।
इस फैसले के बाद प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई तेज कर दी, जिसके कारण विरोध और बढ़ गया। कोर्ट का निर्णय इस मामले में प्रशासन के पक्ष में माना जा रहा है।
शाही मस्जिद हटाने के विवाद का आम आदमी पर प्रभाव
सड़क चौड़ीकरण से उज्जैन शहर में यातायात सुगम होगा। सिंहस्थ 2028 के लिए यह आवश्यक भी है। हालांकि, शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
स्थानीय निवासियों में तनाव और असुरक्षा की भावना बढ़ी है। प्रशासन को स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। आगे भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है।



