संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति की बैठक में पैलेट गन के मुद्दे पर हंगामा हुआ। यह हंगामा विपक्षी सांसदों द्वारा दिल्ली में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर चर्चा की मांग के कारण हुआ। इस मुद्दे ने देश भर में सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपायों और उनके प्रभावों पर एक बहस को जन्म दिया है।
विपक्ष की पैलेट गन पर चर्चा की मांग
विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज पर तत्काल चर्चा की मांग की। उनका कहना था कि यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है और इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। पैलेट गन का इस्तेमाल आमतौर पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अतीत में, जम्मू-कश्मीर में भी इसका इस्तेमाल हुआ है, जहां इसके कारण कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। विपक्ष का मानना है कि दिल्ली में इसी तरह की घटनाएं दोहराई नहीं जानी चाहिए।
👉 यह भी पढ़ें:
- कांग्रेस ने जनगणना प्रक्रिया में बदलाव के लिए पीएम मोदी को लिखा पत्र
- बेरोजगारी पर प्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला, 40 साल में उच्चतम दर
- सीएम योगी का राहुल पर वार: मनुस्मृति टिप्पणी पर जताई आपत्ति
- मध्य प्रदेश भाजपा की रणनीति पर मंथन, 30-31 अगस्त को ओरछा में बैठक
- आरक्षण सुधार या आरक्षण समाप्ति? अखिलेश यादव के बयान से गरमाई सियासत
- मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान से सियासत गरम, निशिकांत दुबे का पलटवार

अध्यक्ष का निर्णय और तर्क
समिति के अध्यक्ष डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने विपक्ष की मांग पर चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में पूर्व-निर्धारित एजेंडे पर ही बात होगी, जो कि ‘बच्चों के खिलाफ अपराध’ की रोकथाम पर केंद्रित था। अध्यक्ष ने कहा कि पैलेट गन का मुद्दा महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे एक अलग मंच पर उठाया जाना चाहिए। उनके इस निर्णय के बावजूद, विपक्ष ने अपनी मांग पर जोर दिया और बैठक का बहिष्कार किया। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पहल
सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व चीफ जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि समिति की रिपोर्ट आगे के फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल दर्शाती है कि न्यायपालिका इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। समिति का गठन यह सुनिश्चित करेगा कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी पक्षों की आवाज सुनी जाए।

राहुल गांधी का विरोध प्रदर्शन
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर पैलेट गन से घायल छात्र साहिल के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे लगे हैं और उनकी आंख पर तीन छर्रे लगे हैं। यह मामला हाई-प्रोफाइल बन गया है और इससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक और मौका मिला है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है और इसे युवाओं के खिलाफ हिंसा करार दिया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुआ था, जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का कथित इस्तेमाल किया। विपक्ष लगातार इस मामले में गृह मंत्रालय से जवाबदेही की मांग कर रहा है। इस मार्च का आयोजन कई छात्र संगठनों द्वारा किया गया था जो विभिन्न मुद्दों पर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे। पैलेट गन के इस्तेमाल ने इस विरोध को और भड़का दिया है।
आगे की संभावनाएं
आम लोगों पर इसका प्रभाव यह हो सकता है कि पुलिस की कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे। यदि समिति की रिपोर्ट में दोष साबित होता है, तो सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। भविष्य में, पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो सकती है। सरकार को ऐसे विकल्पों पर विचार करना होगा जो भीड़ को नियंत्रित करने में प्रभावी हों, लेकिन बिना गंभीर नुकसान के। इससे मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज की भूमिका भी बढ़ेगी, जो ऐसी घटनाओं पर निगरानी रखते हैं।



