वॉशिंगटन: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की विकास दर को लेकर नई तस्वीर सामने आई है। अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून की दूसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था 1.5% की सालाना दर से बढ़ी। यह पहली तिमाही में दर्ज 2.1% की वृद्धि दर से कम है और विश्लेषकों की उम्मीदों से भी नीचे रही।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था को एक साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कारोबार पर टैरिफ का दबाव, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई को लेकर चिंता आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है।
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सरकारी खर्च, निवेश और निर्यात में गिरावट का असर
आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में अमेरिकी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कम होने की प्रमुख वजह सरकारी खर्च, निवेश और निर्यात में कमी रही।
इन क्षेत्रों में कमजोरी ने कुल आर्थिक वृद्धि पर दबाव डाला। हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा सहारा उपभोक्ता खर्च से मिला।
अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों में उपभोक्ता खर्च की हिस्सेदारी दो-तिहाई से अधिक है। दूसरी तिमाही में उपभोक्ता खर्च 3.2% की दर से बढ़ा, जिससे अर्थव्यवस्था को कुछ मजबूती मिली।
यह पहली तिमाही के मुकाबले बड़ा सुधार है। साल की शुरुआत में उपभोक्ता खर्च की वृद्धि दर महज 0.5% रह गई थी।
टैरिफ और वैश्विक तनाव के बीच अमेरिकी कारोबार पर दबाव
अमेरिकी कंपनियां इस समय टैरिफ से जुड़े बढ़ते दबाव के बीच कारोबार कर रही हैं। आयात लागत, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर कंपनियों के फैसलों पर पड़ रहा है।
इसके अलावा, मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव का भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। तेल की कीमतों, व्यापार और निवेश को लेकर अनिश्चितता के बीच अमेरिका समेत दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर नजर बनी हुई है।
ऐसे माहौल में अमेरिकी GDP की धीमी वृद्धि यह संकेत देती है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले महीनों में कई चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
Fed के फैसले पर भी टिकी नजर
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के नए आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब US Federal Reserve ने लगातार पांचवीं बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती फेड के सामने बनी हुई है। बुधवार को फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने बढ़ती कीमतों से निपटने की चुनौती का जिक्र करते हुए कहा कि इसके लिए कोई ‘जादुई समाधान’ नहीं है।
अब बाजार और निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि धीमी आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
क्या अमेरिका की GDP ग्रोथ और धीमी होगी?
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दूसरी तिमाही की 1.5% वृद्धि उम्मीद से कमजोर रही है। हालांकि, मजबूत उपभोक्ता खर्च फिलहाल अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है।



