ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने MSME, स्टार्टअप और स्किल्स को प्राथमिकता देते हुए भारत के विकास के व्यापक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। इस मंच पर उन्होंने बताया कि कैसे ब्रिक्स समूह में शामिल सदस्य देशों के व्यापार, युवाओं, महिलाओं, किसानों और शोधकर्ताओं को सीधे जोड़ने की पहल की जा रही है। इस प्रकार का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम जनता तक पहुंचना चाहिए।
BRICS में MSME, स्टार्टअप और स्किल्स को लेकर भारत का महत्वाकांक्षी विजन
पीएम मोदी ने इस समिट में MSME क्षेत्र के विकास के लिए BRICS MSME सहयोग पोर्टल की बात कही। यह पोर्टल छोटे और मध्यम उद्यमों को वित्त, तकनीकी सहायता और नए बाजारों से जोड़ेगा। इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए एक इनक्यूबेटर नेटवर्क भी स्थापित किया गया है, जो सदस्य देशों के नवाचारों और विशेषज्ञता को साझा करने में मदद करेगा। स्किल्स डेवलपमेंट के क्षेत्र में BRICS CONNECT नामक पहल से रोजगार क्षमता और सामाजिक सुरक्षा को बल मिलेगा।
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इस तरह भारत ने MSME, स्टार्टअप और स्किल्स को ब्रिक्स सहयोग का केंद्र बनाकर आर्थिक समावेशन और नवाचार को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया है।
खेती और किसानों के लिए डिजिटल तकनीक का BRICS नेटवर्क
मोदी ने खेती में तकनीकी क्रांति लाने के लिए ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ की शुरुआत की घोषणा की। यह नेटवर्क कृषि, मछली पालन और एक्वाकल्चर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ाने का काम करेगा।
साथ ही, ‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ के माध्यम से पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास होंगे। यह पहल किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने में सहायक होगी।
युवाओं, महिलाओं और शोधकर्ताओं को BRICS सहयोग में शामिल करने की पहल
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि BRICS के सहयोग में युवाओं, महिलाओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ानी चाहिए। यह सहयोग केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि सीधे तौर पर समाज के हर वर्ग को जोड़ना चाहिए।
इस दिशा में BRICS ने विभिन्न नेटवर्क्स और प्लेटफॉर्म बनाए हैं, जो ज्ञान, कौशल और संसाधनों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाते हैं। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और सामाजिक-आर्थिक विकास को बल मिलेगा।
शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र में BRICS की नई पहल
शहरी विकास के क्षेत्र में ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ के जरिए सदस्य देशों के लिए किफायती और टिकाऊ परिवहन समाधान पर चर्चा होगी। यह पहल तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप है।
ऊर्जा क्षेत्र में स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है। इससे सदस्य देशों को तकनीकी जानकारी और प्रोजेक्ट अनुभव साझा करने में मदद मिलेगी। ये प्रयास क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देंगे और ऊर्जा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाएंगे।
BRICS का ग्लोबल साउथ के लिए समाधान देने का लक्ष्य
मोदी ने BRICS की पहलों को केवल सदस्य देशों तक सीमित न रखकर ग्लोबल साउथ के लिए भी उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समूह की आबादी और GDP में बढ़ोतरी के साथ इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगा।
इस प्रकार, भारत BRICS के जरिये वैश्विक आर्थिक समावेशन और विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार है। यह दृष्टिकोण स्थिरता और समृद्धि का नया संदेश देता है।
BRICS में भारत का विजन: आर्थिक सेतु से सामाजिक समावेशन तक
पीएम मोदी ने BRICS को केवल सरकारों के बीच सहयोग का मंच न बनाकर, आर्थिक सेतु और सामाजिक समावेशन का केंद्र बनाने पर जोर दिया। MSME, स्टार्टअप और स्किल्स को प्राथमिकता देकर भारत ने यह संदेश दिया है कि विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुंचे।
इस पहल से न केवल व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्किल्ड वर्कफोर्स का निर्माण होगा। इससे आने वाले वर्षों में भारत और BRICS देशों के बीच सहयोग नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।



