मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक संदिग्ध कट्टरपंथी की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक ऐसे नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिसकी जांच अब कई राज्यों तक फैल गई है। मध्यप्रदेश आतंक निरोधी दस्ता (ATS) की कार्रवाई के बाद भोपाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के अन्य इलाकों में संदिग्ध संपर्कों की जांच तेज कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, भोपाल के पुराने शहर स्थित काजी कैंप क्षेत्र से मोहम्मद फराज उर्फ खादिल को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसकी निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम नामक एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच आगे बढ़ने पर राजस्थान एटीएस और एसटीएफ के सहयोग से अलवर जिले के टप्पुकरा क्षेत्र से शाकिर मेव नाम के एक अन्य संदिग्ध को भी पकड़ा गया।
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जांच एजेंसियों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ लोग सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन समूहों के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या विभिन्न राज्यों में किसी प्रकार का नेटवर्क खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा था।
ATS ने फराज से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच जारी है। जांचकर्ताओं का ध्यान संदिग्ध विदेशी फंडिंग, ऑनलाइन गतिविधियों और विभिन्न राज्यों में मौजूद संपर्कों पर केंद्रित है।
इसी क्रम में धार निवासी हाजी अहजर को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं हरियाणा के नूंह क्षेत्र से एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। हालांकि, उसकी आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि अभी नहीं की गई है। एजेंसियां उसके संभावित संपर्कों और गतिविधियों की जांच कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ युवाओं को टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने की कोशिश की गई थी। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे सभी संदिग्ध खातों और सोशल मीडिया प्रोफाइल की निगरानी कर रही हैं, जिनका संपर्क इस नेटवर्क से होने की आशंका है।
इस बीच, मोहम्मद फराज के परिवार के घर पर ताला लगा हुआ मिला है। वहीं जिस क्लीनिक में वह काम करता था, वहां भी पिछले कुछ दिनों से गतिविधियां बंद बताई जा रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल मामले की गहन जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्ध गतिविधियों का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और उसके उद्देश्यों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
देश की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं और आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
आपकी राय क्या है?
क्या सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी को और सख्त किया जाना चाहिए ताकि ऐसे संदिग्ध नेटवर्क समय रहते पकड़े जा सकें?
कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं। क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म आज सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं?



