इंदौर। शहर में जलसंकट के बीच गुरुवार को दिनभर मंथन चलता रहा। वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के साथ महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने विधायकों के साथ भी बैठक की। गुरुवार को ही कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त से मुलाकात कर जलकार्य विभाग देख रहे अपर आयुक्त आशीष पाठक की शिकायत की।
न सुनते हैं, न समझते हैं और न काम करते हैं
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से मुलाकात की। चिंटू चौकसे ने कहा कि जलकार्य का काम देख रहे आशीष पाठक न तो समझते हैं, न सुनते हैं और न काम करते हैं। नगर निगम का सबसे महत्वपूर्ण विभाग जलकार्य उनके पास है, लेकिन वे पार्षदों के फोन भी नहीं उठाते। जलसंकट के समय अगर वे पार्षदों के फोन नहीं उठाएंगे, तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। चिंटू चौकसे ने कहा कि हम सभी पार्षदों की मांग है कि आशीष पाठक को जलकार्य विभाग से हटाकर किसी काबिल अफसर को यहां तैनात किया जाए।
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विधायक बोले-टंकियों से क्यों भरे जा रहे टैंकर
इंदौर में जलसंकट के कारण जनप्रतिनिधि भी परेशान हैं। इससे परेशान विधानसभा पांच के विधायक महेंद्र हार्डिया ने महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल लिया था। गुरुवार को महापौर के साथ हुई बैठक में अधिकांश विधायकों ने टंकियों से टैंकर भरने का विरोध किया। विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि शहर में नल कम दबाव से आ रहे हैं। पानी की टंकियों से टैंकर भरने से टंकियां खाली हो रही हैं। नगर निगम को नए हाइट्रेंट बनाना चाहिए। जल वितरण के प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहिए। विधायक मधु वर्मा ने कहा कि सुबह नल आने के समय लोग पंप लगाकर पानी खींचते हैं। सुबह आधे घंटे बिजली कटौती होगी तो 30 प्रतिशत समस्या हल हो जाएगी। वर्मा ने कहा कि नगर निगम जल वितरण का काम देख चुके पुराने अफसरों के अनुभव का भी लाभ उठाए। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि वे सांसद निधि से बोरिंग कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन उसका मेंटेनेंस होना चाहिए। बैठक में विधायक गोलू शुक्ला, महेंद्र हार्डिया और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय शामिल हुए।
एसीएस की बैठक में हुई पानी की समीक्षा
गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी में प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन की मौजूदगी में उच्च स्तरीय बैठक भी हुई। इसमें शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में कहा गया कि जरूरत पड़ने पर टैंकरों की संख्या बढ़ाकर नियमित और समयबद्ध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा नागरिकों की शिकायतों का त्वरित निराकरण करने और जल संकट प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।



