वर्ष 2025 बीत चुका है। नए साल का स्वागत भी हो चुका है और अब नए-नए संकल्प लिए जा रहे हैं। अगर गौर करें तो पाएंगे कि बीते वर्ष में अधिकांश विभागों के पास उपब्धियां गिनाने को के लिए कुछ खास नहीं है। कई विभाग तो पूरे साल संघर्ष करते नजर आए।
बेचारा नगर निगम तो वर्षभर हांफता रहा। मूसलाधार बारिश में बहता शहर, बारिश बंद होने के बाद भी गड्ढों से भरी सड़कें और साल के अंत में गंदे पानी से हुई मौतें। ऐसा नहीं कि नगर निगम के पास बताने को कुछ नहीं था, लेकिन सफलताओं पर विफलताएं भारी पड़ती नजर आईं।
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स्वास्थ्य विभाग विभाग की तो बात ही निराली है, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़े एमवाय अस्पताल पर कोई ध्यान नहीं देता। यह मान लिया जाता है कि वहां अच्छा ही काम चल रहा है, लेकिन 2025 में उसके सिर भी बदनामी का ठीकरा फूटा। एनआईसीयू में चूहों ने नवजात बच्चों को कूतरकर मार डाला और इस घटना ने पूरे देश को चौंका दिया।
इंदौर के अन्य विभागों के पास भी बताने को शायद कुछ खास नहीं था। इसीलिए इक्के-दुक्के प्रेस नोट जारी हुए, लेकिन पुलिस ने दबंगता के साथ प्रेस कान्फ्रेंस कर अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए आगे का प्लान भी बताया।
पुलिस आयुक्त संतोष सिंह ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अपनी बात रखी। खास बात यह कि 2025 को ज्यादा याद करने की बजाए उन्होंने 2026 पर फोकस किया। उन्होंने बताया कि बढ़ती आबादी और शहर के बढ़ते क्षेत्रफल को देखते हुए पुलिस खुद को अपडेट कर रही है। इंदौर कमिश्नरेट में विशेष इकाइयों का गठन किया जा रहा है। इसमें होमोसाइड यूनिट, साइबर यूनिट और साइबर क्राइम यूनिट जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं शामिल हैं, जो अपराधों की जांच को तकनीक और गति प्रदान करेंगी।
कमिश्नर ने शहर के विस्तार को देखते हुए तीन नए थाने खोलने की बात भी कही। इसके साथ ही थानों में बल की कमी भी दूर करने का जिक्र भी किया। कमिश्नर की प्लानिंग में शहर के बिगड़े ट्रैफिक की चिन्ता भी दिखी।
वैसे तो इस साल इंदौर पुलिस पर बदनामी के दाग भी कम नहीं रहे। एक टीआई साहब ने तो पुलिस की बदनामी सुप्रीम कोर्ट तक करवा दी, फिर भी एक अच्छी बात यह है कि पुलिस कम से कम नींद में तो नहीं है। पिछले साल की कानून-व्यवस्था को देखते हुए यह माना जा सकता है कि संतोष सिंह को इंदौर भेजने का सीएम डॉ.मोहन यादव का फैसला गलत नहीं था।



