Monsoon 2026: 100 साल में तीसरा सबसे सूखा जून! El Nino के असर से देश में 42% कम बारिश, IMD ने जुलाई के लिए दी राहत की खबर

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इस साल जून में मानसून की रफ्तार बेहद धीमी रही, जिसके चलते देशभर में सामान्य से 42% कम बारिश दर्ज की गई। मौसम के आंकड़ों के अनुसार, साल 1927 के बाद यह 100 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा जून साबित होने जा रहा है।

जून में सिर्फ 92.2 मिमी बारिश, सामान्य से काफी कम

मौसम विभाग के अनुसार, जून में अब तक देशभर में औसतन केवल 92.2 मिमी वर्षा हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस महीने 157.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। 

पिछले 100 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा जून

मौसम के ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले 100 वर्षों में जून महीने में इससे कम बारिश केवल दो बार दर्ज की गई थी—

  • 2009: 87.5 मिमी
  • 2014: 92.1 मिमी

अब 2026 भी सबसे सूखे जून वाले वर्षों की सूची में शामिल हो गया है।

किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बारिश की कमी?

देश के लगभग सभी हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

  • मध्य भारत: 54% कम बारिश
  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: 41% कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 30% कमी
  • दक्षिण भारत: 28% कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे देश में एक साथ इतनी बड़ी वर्षा कमी El Nino के प्रभाव का स्पष्ट संकेत हो सकती है।

El Nino क्या है और मानसून पर कैसे डालता है असर?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, El Nino प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। इससे वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होती है और हवाओं का पैटर्न बदल जाता है।

इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (IRI) के अनुसार, इस समय El Nino मध्यम तीव्रता के करीब पहुंच चुका है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।

यही वजह मानी जा रही है कि 4 जून को केरल पहुंचने के बावजूद मानसून की प्रगति धीमी रही और पूरे जून महीने में केवल एक दिन ही देशभर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई।

IMD ने जुलाई के लिए दी राहत

हालांकि मौसम विभाग (IMD) ने राहत भरी खबर भी दी है।

IMD के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह से मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। विशेष रूप से मध्य भारत सहित देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने का अनुमान है, जिससे खेती, जलाशयों और पेयजल संकट से कुछ राहत मिल सकती है।

किसानों और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर—

  • खरीफ फसलों की बुआई,
  • जलाशयों के जलस्तर,
  • पेयजल उपलब्धता,
  • बिजली उत्पादन,
  • और खाद्य महंगाई

पर भी देखने को मिल सकता है। इसलिए जुलाई और अगस्त की बारिश इस वर्ष देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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