डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा बयान और कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद की आशंका बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर “ट्रंप जलडमरूमध्य” बता दिया।
ट्रंप ने जिस पोस्ट को साझा किया, उसमें होर्मुज जलडमरूमध्य की तस्वीर को नए नाम के साथ दिखाया गया था। हालांकि, मूल पोस्ट अब दिखाई नहीं दे रही है, जिससे इस दावे को लेकर और चर्चा तेज हो गई है।
👉 यह भी पढ़ें:
- UN में भारत की बड़ी अपील: युद्ध का असर अब सिर्फ रणभूमि तक नहीं, वैश्विक Food Security पर संकट
- होर्मुज स्ट्रेट पर फिर बढ़ा तनाव! ट्रंप के ‘माइंस हटाने’ के दावे को ईरान ने किया खारिज
- होर्मुज स्ट्रेट से हटाई गईं सभी बारूदी सुरंगें? ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर पर हमला! अज्ञात प्रोजेक्टाइल से इंजन रूम क्षतिग्रस्त
- होर्मुज स्ट्रेट को ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताने वाला ट्रंप का नक्शा, ईरान से फिर बढ़ा तनाव
- ईरान युद्ध खत्म करने के पक्ष में, ट्रंप का सख्त रुख—क्या शुरू होगी शांति वार्ता?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य इन दिनों वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसे विश्व की ऊर्जा जीवनरेखा भी कहा जाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष के चलते इस जलडमरूमध्य पर असर पड़ा है। पहले ईरान द्वारा इसे बंद किए जाने से तेल आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ीं। अब अमेरिका द्वारा की गई नाकाबंदी ने हालात को और जटिल बना दिया है।
हालांकि दोनों देशों के बीच फिलहाल संघर्षविराम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन अमेरिका ने नाकाबंदी जारी रखी है। ईरान ने समझौते के तहत जलमार्ग खोलने का प्रस्ताव भी दिया, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया।
ट्रंप ने नाकाबंदी का बचाव करते हुए कहा कि यह बमबारी से भी ज्यादा प्रभावी है। उनका दावा है कि इससे ईरान पर भारी दबाव पड़ा है और वह जल्द समझौते के लिए मजबूर हो सकता है। साथ ही, उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद कराने की अपनी मांग पर भी जोर दिया, जिससे गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि नाकाबंदी के कारण ईरान की तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ रही है और देश के ऊर्जा तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।



