अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं, लेकिन समझौते की स्याही सूखने से पहले ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ ने संकेत दिया है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait), से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूला जा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-बिंदुओं वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल या शुल्क नहीं लेगा।
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सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में गालिबाफ ने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा। ईरान को इस जलमार्ग पर संप्रभुता का अधिकार है और स्वाभाविक रूप से हम इसकी सेवाओं के लिए शुल्क वसूलेंगे।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित G7 Summit के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के अनुसार ईरान ने यह वादा किया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित नहीं करेगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान का यह नया रुख अमेरिका-ईरान समझौते को कमजोर करेगा? क्या Hormuz Strait पर फीस वसूली से Global Oil Market और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होगा? और क्या Middle East में तनाव फिर से बढ़ने वाला है?
आपकी राय क्या है? क्या ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर शुल्क वसूलने का अधिकार होना चाहिए, या यह अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन है? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।



