पश्चिम बंगाल में चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। संदिग्धों द्वारा किया गया एक डिजिटल भुगतान अब जांच का सबसे अहम सुराग बन गया है। इसी के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश से तीन और बिहार से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है।
मध्यमग्राम में बुधवार रात हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद कई दिनों तक पुलिस के हाथ खाली थे, लेकिन बाली टोल प्लाजा पर किए गए एक डिजिटल लेनदेन ने जांच की दिशा बदल दी। जांचकर्ताओं के अनुसार, हमलावर भागते समय टोल पर भुगतान कर बैठे, जिसके बाद निगरानी चित्रों और लेनदेन से जुड़े मोबाइल नंबरों तथा बैंक खातों को खंगाला गया।
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पुलिस का मानना है कि यही डिजिटल निशान अब हमलावरों की पहचान और उनके भागने के रास्ते तक पहुंचने में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या पूरी योजना और पेशेवर तरीके से अंजाम दी गई। हमलावरों ने उनके घर से करीब दो सौ मीटर पहले उनकी गाड़ी को एक सिल्वर कलर की कार से रोका। जैसे ही वाहन रुका, मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने सीधे उसी खिड़की पर गोलियां बरसाईं जहां रथ बैठे थे।
विशेष जांच दल के अधिकारियों का कहना है कि शूटरों को रथ की बैठने की सही जानकारी पहले से थी, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह किसी बड़े सुपारी गिरोह का काम हो सकता है।
पूरे मामले में कम से कम आठ लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश और बिहार में लगातार छापेमारी कर रही हैं। वारदात में इस्तेमाल की गई कार और दो मोटरसाइकिलें भी बरामद कर ली गई हैं, जिन्हें चोरी का बताया जा रहा है।
चंद्रनाथ रथ भारतीय वायुसेना के पूर्व कर्मी थे और उन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी का बेहद करीबी माना जाता था।



