नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल है ही नहीं, ये भारत का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि ये बिल जब साल 2023 में इसी सदन में पास हो गया था, तो फिर अब तक क्यों लटका हुआ था।
राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सत्ता हथियाना चाहती है। जातिगत जनगणना को दरकिनार कर ओबीसी समुदाय से बचने और उनके मुद्दों से दूरी बनाने का प्रयास कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ओबीसी वर्ग के अधिकार छीने जा रहे हैं। सत्ता पक्ष देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से घबराया हुआ है। हार के डर से चुनावी व्यवस्था को फिर से ढालने की कोशिश की जा रही है।
पीएम और मेरी पत्नी नहीं है
राहुल गांधी ने कहा कि देश में महिलाएं सेंट्रल फोर्स होती हैं। हम सभी के जीवन में मां-बहन के रूप में महिलाएं हैं। उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि कल जब वह स्पीच दे रही थी, पांच मिनट में वह किया जो मैं 20 साल में नहीं कर पाया। अमित शाह के चेहरे पर स्माइल आ गई। राहुल गांधी ने कहा कि हम सबने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है। माँ, बहन, पत्नी से… पीएम और मेरी पत्नी नहीं है! मेरी बहन ने कल अपने भाषण के दौरान अमित शाह को भी हंसा दिया.. ये मुझे सीखना है। सब जानते हैं कि भारतीय समाज में ओबीसी, दलित, अल्पसंख्यक समुदाय और महिलाओं के साथ कैसा भेदभाव किया गया? ये बिल जाति जनगणना को किनारे करने के लिए है।
ओबीसी और दलित को कोई जगह नहीं देता
राहुल गांधी ने कहा कि अपनी घटती ताकत के कारण आप देश के नक्शे को बदलना चाहते हैं। आपने असम, जम्मू कश्मीर में किया और अब देश में करने के लिए आपको संविधान संशोधन चाहिए। ये देश विरोधी है। हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे। उद्योग-धंधे, निजी क्षेत्र, न्यायपालिका में दलित कहां हैं? आप ओबीसी और दलित को हिंदू कहते हैं, लेकिन उन्हें देश में कोई जगह नहीं देते।
अपनी दादी इंदिरा गांधी का किया जिक्र
राहुल गांधी ने कहा कि मुझे याद है, जब मैं छोटा था, मुझे अंधेरे से बहुत डर लगता था। हमारे यहां एक बड़ा कुत्ता था, जो मुझ पर और बहन(प्रियंका) पर अटैक किया करता था। हम रात में गार्डेन की ओर जाने से इस वजह से डरा करते थे। एक बार दादी को इसके बारे में पता चला। राहुल ने कहा कि जब एक बार मेरे पैरेंट्स डिनर पर गए हुए थे तो मेरी दादी उस गार्डन में ले गईं और मुझे वहां बंद कर दिया। मैं डर रहा था और पैर कांप रहे थे। उन्होंने मुझसे पूछा तुम किससे डर रहे हो? मैंने कहा कि दादी मैं सांप, कुत्तों से और बहुत चीजों से डर रहा हूं। उन्होंने मुझसे आकर कहा कि तुम इन सब चीजों से नहीं बल्कि अपने दिमाग से डर रहे हो। तुम जो सोच रहे हो उस कल्पना से डर रहे हो। तुम्हें अंधेरे से नहीं डरना चाहिए क्योंकि जो सच्चाई होती है प्राय: अंधकार में होती है। दादी ने कहा कि आपको लड़ना पड़ता है उस अंधकार से, ये वाकई में राजनीतिक लेसन था, जिसका एहसास मुझे आज हो रहा है।


