नई दिल्ली। 26/11 को मुंबई में हुए हमले को लेकर एक बयान देकर फंसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी.चिंदबरम ने अब यू-टर्न ले लिया है। उनके बयान से पार्टी की किरकिरी हो रही थी। जब कांग्रेस आलाकमान ने फटकार लगाई तो अब चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर कहा कि मैंने किसी भी इंटरव्यू में मैंने यह नहीं कहा कि अमेरिका ने हमें रोक दिया था। फिर भी हर चैनल और ट्विटर पर लोग मेरी बातों को तोड़–मरोड़कर पेश कर रहे हैं। यही मीडिया से बात करने का खतरा है।
उल्लेखनीय है कि चिदंबरम ने मंगलवार को एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि 26/11 हमले के बाद उनके मन में पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य जवाबी कार्रवाई का विचार आया था। उन्होंने कहा था कि उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की थी, लेकिन अंततः सरकार ने कूटनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया। इस निष्कर्ष पर पहुंचने में अंतरराष्ट्रीय दबाव अहम कारण था। खासकर अमेरिका सहित कई देशों ने भारत से अपील की थी कि युद्ध का रास्ता न अपनाया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय की अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस दिल्ली आई थीं और उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री और उनसे मिलकर सैन्य कार्रवाई से बचने की सलाह दी थी। चिदंबरम ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह सरकार का झुकाव विदेश मंत्रालय और आईएफएस अधिकारियों की राय की ओर था, जो मानते थे कि पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जगह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक दबाव बनाना ज्यादा सही रहेगा।
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भाजपा साध रही थी जमकर निशाना
चिदंबरम के इस बयान के बाद भाजपा को एक मुद्दा मिल गया था। भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने 26/11 जैसे बड़े आतंकी हमले पर विदेशी दबाव में आकर सही प्रतिक्रिया नहीं दी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक्स पर लिखा था कि 17 साल बाद चिदंबरम ने स्वीकार किया कि 26/11 को विदेशी दबाव में गलत तरीके से संभाला गया। राष्ट्र पहले से जानता था, लेकिन यह स्वीकारोक्ति बहुत देर से और बहुत कम आई है।
कांग्रेस नेताओं ने जताया था विरोध
कांग्रेस के कई नेताओं ने चिदंबरम के इस बयान का विरोध किया था। दरअसल बहुत जल्द ही बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होने वाली है। ऐसे में चितंबरम ने भाजपा के हाथ एक बड़ा मुद्दा दे दिया था। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने चिदंबरम को निशाने पर लेते हुए कहा कि 17 साल बाद यह बयान देकर चिदंबरम क्या साबित करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम का यह बयान भाजपा को फायदा पहुंचाने वाला है। अल्वी ने पूछा क्या इसका मतलब यह है कि वह अमेरिकी दबाव में काम कर रहे थे? चिदंबरम 16 साल बाद यह दावा क्यों कर रहे हैं? अगर आप पर दबाव बनाया जा रहा था तो आपने उसी समय इस्तीफा क्यों नहीं दे दिया?



