नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारतीय सेना और क्लॉज द्वारा आयोजित ‘चाणक्य डिफेन्स डायलॉग-2025′ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सैन्य इतिहास का एक निर्णायक क्षण बताते हुए इसे काउंटर–टेररिज्म तथा प्रतिरोधक रणनीति की नई दिशा बताया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता भारत की आतंकवाद–रोधी और प्रतिरोधक रणनीति का निर्णायक मोड़ साबित हुई है। इस कार्रवाई से दुनिया ने न सिर्फ भारत की सैन्य क्षमता को देखा, बल्कि शांति की दिशा में दृढ़ लेकिन जिम्मेदार कदम उठाने की उसकी नैतिक स्पष्टता को भी स्वीकार किया। इस सैन्य कार्रवाई ने आतंकवाद के ढांचे को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई। भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में पाकिस्तान की ओर से भी हमले हुए, लेकिन भारत की सभी जवाबी सैन्य कार्रवाइयाँ ऑपरेशन सिंदूर के तहत जारी रहीं। दोनों देशों के बीच तीखा सैन्य तनाव 10 मई की शाम एक समझौते के बाद थमा।
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बार-बार अपनी क्षमता साबित कर चुकी है सेना
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल पारंपरिक युद्ध, काउंटर–इंसर्जेंसी और मानवीय संकटों में अपनी पेशेवर क्षमता को बार–बार साबित कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सेना की प्रतिबद्धता ने न सिर्फ सीमाओं को सुरक्षित किया है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दिया है कि भारत शांति चाहता है, पर अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। मंच पर मौजूद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी इस अवसर पर संबोधन दिया।
नई रणनीतिक चुनौतियों का किया जिक्र
राष्ट्रपति ने कहा कि आज का वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। प्रतियोगी शक्ति–केन्द्र, तकनीकी बदलाव, और नई रणनीतिक चुनौतियां अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। साइबर, स्पेस, सूचना और कॉग्निटिव वारफेयर जैसे नए क्षेत्रों ने शांति और संघर्ष की रेखा को धुंधला कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सभ्यतागत मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए हुए है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सेना ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ के तहत संरचनात्मक सुधार कर रही है।



