इंदौर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के इंदौर अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। एक-दो बार नाम भी भेजे गए। फिर शिकायतें भी हुईं, नई सूची बनी लेकिन फिर मामला अटक गया। अब बताया जा रहा है कि संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी टांग फंसाकर बैठ गए हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजयुमो नगर अध्यक्ष की नियुक्ति का मामला बार-बार टलता जा रहा है। पहले जो नाम भेजे गए, उनमें कई पर आपत्ति आ गई और शिकायतें भोपाल पहुंचने लगीं। इसके बाद नाम तय करने का सिलसिला लगातार चल रहा है, लेकिन कुछ फाइनल नहीं हो पा रहा। नियुक्तियों में राजनीति भी इतनी हावी है कि कई बार तो भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का इंदौर दौरा भी टल गया। पिछले दिनों टेलर इंदौर आए तो उम्मीदवारों में फिर से उम्मीद जगी, लेकिन मामला अभी भी वहीं का वहीं है।
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संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी बन रहे रोड़ा
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि भाजयुमो इंदौर अध्यक्ष पद पर तो कब की नियुक्ति हो चुकी होती, लेकिन संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी रोड़ा बने हुए हैं। इंदौर के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा भेजे नाम उन्हें पसंद नहीं आ रहे। वे किसी अन्य नाम के लिए ही अड़े हुए हैं। ऐसे में अध्यक्ष के नाम का फैसला नहीं हो पा रहा।
सभी विधायक भी हैं परेशान
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि संघ पदाधिकारी की जिद के कारण सारे विधायक भी परेशान हैं। भाजयुमो इंदौर अध्यक्ष के लिए विधायक रमेश मेंदोला, रोहित चौधरी के लिए कोशिश कर रहे हैं। विधायक मालिनी गौड़ की तरफ से मयूरेश पिंगले का नाम गया है, जबकि मंत्री पुत्र आकाश विजयवर्गीय की तरफ से अमित पालीवाल का नाम आगे बढ़ाया गया है। इधर, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता ने धीरज ठाकुर का नाम दिया है। इनके अलावा भी विधायकों और अन्य नेताओं ने अपने समर्थकों के नाम दिए हैं।
हाथ जोड़ रहे मूल कार्यकर्ता
विधायकों ने जिन नामों की सिफारिश की है, वे अधिकांश मूल कार्यकर्ता हैं। ये लंबे समय से भाजयुमो के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में ये कार्यकर्ता संघ के उस वरिष्ठ पदाधिकारी से हाथ जोड़कर पूछ रहे हैं कि आखिर हमारी गलती क्या है? आखिर क्यों नहीं मिल रहा हमारी मेहनत का प्रतिसाद? माना कि संघ, भाजपा पर हावी रहता है लेकिन मूल कार्यकर्ताओं की तो उपेक्षा नहीं की जाती है। भाजपा के कई नेता भी कह रहे कि संघ की ऐसी परंपरा नहीं रही है, लेकिन पता नहीं उक्त वरिष्ठ पदाधिकारी को क्या हो गया है?



