डायमंड कॉलोनी विवाद से पीछा छुड़ाने की कोशिश में जुटा भूमाफिया दीपक मद्दा, पुलिस को भी बरगलाने की कोशिश

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इंदौर। डायमंड कॉलोनी में दो पुलिकर्मियों की पिटाई के बाद पुलिस ने भूमाफिया दिलीप सिसोदिया उर्फ दीपक मद्दा को भी पूछताछ के लिए बुलाया था। मद्दा पहले प्रतीक संघवी के साथ संयम इंफ्रा कंपनी में डायरेक्टर रह चुका है। पुलिस ने मद्दा से इस मामले से जुड़ाव संबंधी कई प्रश्न पूछे।

सूत्र बताते हैं कि डायमंड कॉलोनी के पूरे विवाद का मास्टरमाइंड दीपक मद्दा ही है, लेकिन अब वह इससे पीछा छुड़ाना चाहता है। बताया जा रहा है उसने पुलिस को भी बरगलाने की कोशिश की है। मद्दा पहले भी ऐसा करता रहा है और पुलिस-प्रशासन की आंखों में कई बार धूल झोंक चुका है। यही वजह है कि कई मामलों में नामजद एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जेल से बाहर है।

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दृश्यम स्टाइल में पीछा छुड़ाने की कोशिश

मद्दा पुलिस से कह रहा है कि वह 2019 में ही इससे बाहर हो गया था। ऐसे में पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि जब वह बाहर हो चुका था, तब प्रतीक संघवी से 45 प्रतिशत की हिस्सेदारी का कच्चा एग्रीमेंट कैसे बनवा लिया। मद्दा दरअसल दृश्यम फिल्म के स्टाइल में खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि उसने प्रतीक संघवी पर पहले दबाव बनाया। इसके बाद प्रतीक के पिता स्व. सुरेंद्र संघवी के करीबी लोगों तक यह बात पहुंचाई कि उसको आधा हिस्सा लेना है। फिर 45 प्रतिशत की हिस्सेदारी भी कर ली। जब खूब हल्ला मचा तो उसने धीरे से इस सौदे में विशाल खंडेलवाल की एंट्री करा दी। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि इस जमीन के सारे मामले मद्दा ही निपटा रहा था। चाहे बब्बू-छब्बू का मामला हो या मोहसिन का सब में इसी की संल्पिप्तता रही है।

विशाल खंडेलवाल कर रहा मद्दा का काम

सूत्र बताते हैं कि विशाल खंडेलवाल ही इन दिनों दीपक मद्दा के सारे काम कर रहा है। देवी अहिल्या से लेकर डायमंड कॉलोनी तक के काम खंडेलवाल निपटा रहा है। खंडवा रोड के किसी जमीन का मामला भी खंडेलवाल ही कर रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि खंडेलवाल ने कहा है कि 15 दिन रुक जाओ, इसके बाद सारा मामला रफा-दफा करा देंगे। बताया जाता है कि मद्दा इस मामले में पुलिस को गुमराह कर रहा है। खुद को भोला बताकर इस विवाद से बाहर होने की कोशिश में वह जुटा है। मद्दा का कहना है कि इस सौदे से उसका कोई लेनादेना नहीं और विशाल खंडेलवाल को पांच प्रतिशत का पार्टनर बता रहा है।

सरकार को लगा चुका है चूना

सूत्र बताते हैं कि मद्दा की संलिप्तता के बाद ही यह जमीन डायमंड गृह निर्माण संस्था में कर दी गई। यह संस्था पहले से ही विवादों में थी और इसकी रजिस्ट्री के कई मामले सामने भी आए थे। संस्था में जमीन शामिल कराने के बाद मद्दा ने सहकारिता विभाग से मिलकर डायमंड गृह निर्माण संस्था ही डिजाल्व करा दी। इस तरह इस मामले में सरकार के स्टाम्प की चोरी ही नहीं की गई, बल्कि आयकर से लेकर कई विभागों को भी चूना लगाया गया।

प्रशासन जांच करे तो खुले कलई

इस मामले में प्रशासन को जांच करनी चाहिए कि आखिर प्राइवेट जमीन गृह निर्माण संस्था में कैसे आ गई और इसके बाद वह संस्था डिजाल्व कैसे हो गई। सहकारिता के नियमों में साफ-साफ लिखा है कि संस्था की जमीनों पर सदस्य ही मकान बना सकते हैं और इसीलिए यह पूरा काम नो लॉस, नो प्रॉफिट के आधार पर होता है।

मद्दा को पहले से पता था कि पुलिस बुलाएगी

सूत्र यह भी बताते हैं कि पुलिस ने जब प्रतीक संघवी को बुलाया तो मद्दा उदयपुर में था, लेकिन उसे यह भी पता था कि पुलिस उसे पूछताछ के लिए बुलाएगी। इससे पहले जब खजराना में उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ था, तो उसे पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार किया गया था। इसलिए मद्दा इस बार सावधानी से पूरा खेल जमा रहा है। इसमें कनाड़िया टीआई की संलिप्तता भी सामने आ रही है।

दिग्विजय सिंह को बताया गया खंडेलवाल का नाम

सूत्र यह भी बताते हैं कि दीपक मद्दा ने ही पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को विशाल खंडेलवाल का नाम बताया था, ताकि शक की सूई उसके ऊपर न रहे। दिग्विजय सिंह ने इस मामले में बयान देते समय खंडेलवाल का नाम लिया था। मद्दा को दूसरे को उलझाकर हर मामले से इसी तरह निकलने की फितरत भी रही है। वह अपना काम निकालकर फिर उस व्यक्ति से दूर हो जाता है। बताया जाता है कि मद्दा इस मामले के बाद सहकारिता विभाग में सक्रिय हो गया है।

कई मामलों में पेश नहीं हुआ चालान

मद्दा पुलिस-प्रशासन के अफसरों के साथ मिलकर अपना काम निकालने में माहिर हैं। इसीलिए उसके खिलाफ दर्ज कई प्रकरणों में आज तक चालान पेश नहीं हुए। देवी अहिल्या मामले में तो मद्दा के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज है। अभी कल्पतरू सहित कई केस में चालान पेश नहीं हुआ है। मद्दा इतना शातिर है कि वह एसीएस का फर्जी पत्र भी ले आया था। इस मामले में भी उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। खजराना के एक पुलिस अधिकारी भी उसके एमआईजी वाले मामले की खात्मा कराने की कोशिश में जुटे थे, तब तक डायमंड कॉलोनी विवाद सामने आ गया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने सख्ती दिखाते हुए चालान पेश करने के निर्देश दिए।

डीसीपी ने कहा-जांच कर रहे हैं

डीसीपी जोन 2 अमन सिंह राठौर ने बताया कि दिलीप सिसोदिया उर्फ दीपक मद्दा नाम के व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। डायमंड कॉलोनी मामले में जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके बारे में यह पता लगाया जा रहा है कि वे किसके लिए काम कर रहे थे। दीपक मद्दा से सारे विषयों में पूछताछ की गई। चूंकि वह संयम इंफ्रा से जुड़ा हुआ था, इसलिए उससे पूरी जानकारी निकाली गई। उससे पूछा गया कि कंपनी कैसे बनी थी, वह कब तक इसमें डायरेक्टर था। जमीन का अधिग्रहण कब हुआ था आदि की जानकारी ली गई। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वर्तमान में जो आरोपी हैं, उससे मद्दा का कोई लिंक है या नहीं।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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