जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निजी स्कूल संचालकों को राहत दी है। कोर्ट ने फीस वृद्धि और पाठ्य-पुस्तक घोटाले में आरोपी बनाए गए स्कूल संचालकों और स्टाफ के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई न करने की बात कही है। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने शुक्रवार को स्कूल संचालकों को राहत देते हुए कहा कि वे जिला समिति की जांच में पूरा सहयोग करें। अगली सुनवाई 5 नवंबर को है, तब तक स्कूल संचालकों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होगी।
उल्लेखनीय है कि 24 अक्टूबर को स्कूल संचालकों ने जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा था कि यह याचिकाएं समय से पहले ही लगा दी गई हैं। हाईकोर्ट में इसी आदेश को चुनौती दी गई थी। निजी स्कूल संचालकों को डर था कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। निजी स्कूलों की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि चूंकि अब छुट्टियां हैं, इसलिए प्रशासन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार भी कर सकता है। इस पर यह अपील दायर की गई है। निजी स्कूलों के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि पहले ऐसी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिला समिति द्वारा शिकायतों जांच की जा रही है। अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। कोर्ट में अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी। तब तक जिला समिति को भी अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
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