संभल में नमाज के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम-एसपी को लगाई फटकार, कहा- इस्तीफा दीजिए या तबादला करवा लीजिए

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प्रयागराज। संभल में रमजान के दौरान नमाजियों की संख्या सीमित करने के स्थानीय प्रशासन के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती, अगर अधिकारी कानूनव्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकते तो इस्तीफा दें या तो तबादला करवा लें।

शनिवार को जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वो यह सुनिश्चित करे कि हर हाल में कानून का राज कायम रहे। कोर्ट ने कहा कि यदि स्थानीय अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को लगता है कि कानूनव्यवस्था की ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसके कारण वे परिसर के अंदर पूजा करने वालों की संख्या सीमित करना चाहते हैं, तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर अपना तबादला करवा लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य का हस्तक्षेप केवल तभी आवश्यक होता है और अनुमति केवल तभी मांगी जानी चाहिए जब प्रार्थनाएं या धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों या सार्वजनिक संपत्ति तक फैल रहे हों।

याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उसे गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि यहां एक मस्जिद स्थित है। हालांकि कोर्ट में याचिकाकर्ता ने मस्जिद या किसी ऐसे पूजा स्थल की कोई भी तस्वीर पेश नहीं की जिसके अंदर नमाज अदा की जानी हो। राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट में गाटा संख्या 291 के मालिकाना हक के बारे में बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में यह मोहन सिंह और भूरज सिंह के नाम पर दर्ज है जो दोनों सुखी सिंह के बेटे है उनके नाम पर दर्ज है। कोर्ट ने बताया गया कि उस जगह पर केवल बीस नमाजियों को ही अनुमति दी गई है जो वहां नमाज अदा कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि परिसर के अंदर नमाज अदा करने के लिए इससे कहीं ज्यादा लोग सकते हैं क्योंकि अभी रमजान का महीना चल रहा है। राज्य की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि कानूनव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उपासकों की संख्या को सीमित करने वाला ऐसा आदेश पारित किया गया है। कोर्ट ने राज्य की तरफ से दी गई दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय किसी तय पूजा स्थल पर या निजी संपत्ति पर बिना किसी सरकारी अनुमति के शांतिपूर्वक प्रार्थना कर सकें। अब इस मामले में सुनवाई 16 मार्च को होगी।

Ardhendu Bhushan
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Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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