पुष्प विहार के प्लॉटधारकों की मन गई दीपावली, आईडीए ने शुरू कर दी एनओसी की प्रक्रिया, विज्ञप्ति जारी

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इंदौर। लंबे समय से अपने मेहनत की कमाई से खरीदे हुए प्लॉट पर मकान बनाने का सपना देख रहे पुष्प विहार के 950 प्लॉटधारकों की दीपावली 22 अक्टूबर को ही मन गई। अब उनका सपना पूरा हो रहा है। आईडीए ने योजना क्रमांक 171 की जमीन छोड़ने के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी है। पूरी योजना के मुक्त होने से करीब छह हजार प्लॉटधारकों के सपने पूरे होंगे।

आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार ने बताया कि मंगलवार को विज्ञप्ति जारी कर दी गई। योजना क्रमांक 171 में 151 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इसमें 13 सोसायटियों और 211 लोगों की जमीन है। आईडीए को इनसे 5 करोड़ 84 लाख रुपए लेने हैं। दो माह में राशि जमा करानी होगी। राशि जमा होने के बाद डिनोटिफाई करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद एनओसी की प्रक्रिया शुरू होगी।

करीब तीन दशक का इंतजार खत्म

स्कीम 171 में पुष्प विहार सहित कई कॉलोनियों के हजारों प्लॉटधारक करीब तीन दशक से मकान बनाने के लिए भटक रहे हैं। योजना में शामिल होने के कारण प्लॉटधारकों को भवन निर्माण और अन्य अनुमतियां नहीं मिल पा रही थीं। पिछले दिनों आईडीए की बोर्ड बैठक में इस योजना के तहत आनेवाली जमीनों को मुक्त करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए संभागायुक्त व आईडीए अध्यक्ष दीपक सिंह और आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार लगातार कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा विधानसभा पांच के विधायक महेंद्र हार्डिया भी इंदौर से लेकर भोपाल तक प्रयासरत थे। पुष्प विहार संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि विधायक महेंद्र हार्डिया कई बार उनके सामने ही आईडीए अधिकारियों से लेकर सीएम तक को फोन लगा चुके थे।

योजना में 13 सोसायटी हैं शामिल

आईडीए की योजना क्रमांक 171 में 13 सोसायटियां देवी अहिल्या श्रमिक कामगार, न्याय विभाग कर्मचारी संस्था, इंदौर विकास गृह निर्माण, लक्ष्मण गृह निर्माण, सूर्या संस्था, सन्नी कोऑपरेटिव, मजदूर पंचायत, मारुति गृह निर्माण, त्रिशला गृह, संजना गृह निर्माण, रजत गृह निर्माण, श्रीकृपा गृह निर्माण संस्था, अप्सरा गृह निर्माण सहकारी संस्था की जमीनें शामिल हैं। स्कीम 171 से संस्थाओं की जमीन मुक्त होने से पुष्प विहार के 950 प्लॉटधारकों सहित करीब छह हजार लोगों को फायदा होगा। सूची प्रकाशन के बाद दो माह में शुल्क जमा करना होगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

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