अपने टूटने की खबर सुन आंसू बहाता बीआरटीएस बोला-मुझे बनाने वालों का कॉलर पकड़ पूछो, मुझ पर 300 करोड़ रुपए क्यों फूंके

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इंदौर के ट्रैफिक जाम में अपनी अहम भूमिका निभा रहा एबी रोड पर शान से खड़ा बीआरटीएस पहले इतना दु:खी कभी नहीं दिखा। जब कभी भी भंयकर ट्रैफिक जाम में हम अन्य वाहन चालकों के साथ सिग्नल पर रेंग रहे होते थे तो बीआरटीएस से तेज रफ्तार गुजरती बसें मुंह चिढ़ाती थीं। तब हमने बीआरटीएस की खिलखिलाहट कई बार सुनी है। मैं उधर से गुजर रहा था तो आज उसकी खिलखिलाहट गायब थी। वो मुंह लटकाए बैठा था। मैंने सोचा चलो आज इसी से हालचाल पूछ लेते हैं।

मैंने पूछा-आज क्यों गुमसुम हो। क्या आजू-बाजू ट्रैफिक कम है, इसलिए दुखी हो।

वह बोला-नहीं, तुम्हें खबर नहीं है क्या? अब मुझे तोड़ने वाले हैं। पहले सीएम ने चमकाया और अब हाईकोर्ट ने भी अपना हथौड़ा चला दिया है।

मैंने कहा-हां, यह बात तो तुम्हारे दुखी होने की है, लेकिन जो लोग हर दिन तुम्हारे आसपास जाम में फंसे रहते हैं, वे तो खुश होंगे।

वह बोला-तुम लोग हमेशा जाम की बात करते रहते हो, लेकिन जरा उनकी भी तो सोचो, जिन्हें मैं पिक आवर में भी समय पर दफ्तर और दफ्तर से घर पहुंचा देता हूं। अब उनका क्या होगा?

मैंने कहा-ऐसे लोगों की संख्या काफी कम थी। इससे ज्यादा लोग तो तुम्हारे आजू-बाजू फंसे रहते थे।

वह बोला-कभी तुमने देखी है मेरी बसों को। खड़े होने की भी जगह नहीं रहती। इसमें अधिकांश वे लोग होते हैं, जो तुम्हारी तरह दोपहिया पर फर्राटा नहीं भर सकते। बेचारे आधे से ज्यादा तो स्टूडेंट हैं। बाहर से आए हुए। इसके बाद महिलाएं हैं, जो अपना वाहन अफोर्ड नहीं कर सकतीं।

मैंने कहा-वे अब कोई दूसरा उपाय ढूंढ लेंगे, तुम तो शहर के लिए नासूर ही हो।

वह बोला-मुझे नासूर कह रहे हो। मुझे नासूर बनाया किसने। क्या मैंने मना किया था कि मेरी लेन में सिटी बसें नहीं चलाओ। अगर सिर्फ सिटी बसों को ही मिक्स लेने से निकाल लेते तो भी ट्रैफिक आसान हो जाता। मेरी लेन में इतना ट्रैफिक नहीं रहता कि सिटी बसें नहीं चल पातीं।

मैंने कहा-तुम्हें बनाया ही गया था सिर्फ बीआरटीएस की बसों के लिए।

वह बोला-मैंने माना कि इसीलिए बनाया गया था, लेकिन शहर की जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव तो हो सकता था। तोड़ने से तो अच्छा था कि नियम ही तोड़ लेते।

मैंने कहा-तुम अपने बनने और टूटने के पीछे किसकी गलती मानते हो?

वह बोला-जाहिर है जिसने मुझे बनाया। प्लान बनाने वालों को नहीं दिखा कि एलआईजी से नवलखा तक बॉटल नेक रहेगा। प्लान बनाने वालों को क्या यह भी नहीं दिखा कि मेरे बन जाने से मेरी लेन के दोनों तरफ ट्रैफिक जाम होगा। अरे, उन्हें तो सिर्फ 300 करोड़ रुपए से मिलने वाला कमीशन दिखाई दे रहा था। अब जाओ उन बनाने वालों की कॉलर पकड़ो और उनसे पूछो कि जनता के 300 करोड़ में माचिस क्यों लगाई?

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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