West Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब लगातार नए संकटों से घिरती जा रही है। पार्टी के नेताओं के खिलाफ जनता का गुस्सा, बगावत की खबरें और अब पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
ताजा मामले में कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 से टीएमसी पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को कथित जबरन वसूली (Extortion Case) के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। पाटुली थाना पुलिस ने पहले उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और बाद में हिरासत में लेकर औपचारिक गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
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गिरफ्तारी से पहले बढ़ा था दबाव
सूत्रों के मुताबिक, इसी वार्ड के टीएमसी युवा अध्यक्ष सौरव घोष को भी कुछ घंटे पहले गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद बप्पादित्य दासगुप्ता को थाने तलब किया गया, जहां पूछताछ के बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
TMC के लिए बढ़ती मुश्किलें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। हाल के दिनों में कोलकाता नगर निगम से जुड़े कई टीएमसी नेताओं पर कार्रवाई हुई है। बप्पादित्य दासगुप्ता ऐसे छठे टीएमसी प्रतिनिधि बताए जा रहे हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले भी कई पार्षदों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
बीजेपी से TMC तक का सफर
दिलचस्प बात यह है कि बप्पादित्य दासगुप्ता पहले बीजेपी से जुड़े हुए थे। उन्होंने 2015 के निकाय चुनाव में जीत हासिल की थी और बाद में टीएमसी में शामिल हो गए थे। उन पर 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा से जुड़े आरोप भी पहले लग चुके हैं।
‘कट मनी’ विवाद फिर चर्चा में
इसी बीच सोशल मीडिया पर बंगाल के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें कुछ स्थानीय नेताओं को कथित तौर पर लोगों को बुलाकर ‘कट मनी’ वापस करते हुए दिखाया जा रहा है। इन वीडियो की वजह से भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है।
क्या TMC के अंदर बढ़ रही है बेचैनी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रही गिरफ्तारियां, नेताओं के इस्तीफे और जनता के बढ़ते विरोध ने तृणमूल कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल…
क्या ये गिरफ्तारियां सिर्फ कानूनी कार्रवाई हैं या पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत? क्या TMC जनता का खोया भरोसा फिर से जीत पाएगी?
आपकी क्या राय है? क्या बंगाल में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।


