इंदौर। विधानसभा 4 में एक कुत्ते को गंदगी फैलाने को लेकर हुआ विवाद हालांकि अभी थमा नहीं है, लेकिन इस पर पानी डालने की कोशिश हो रही है। इस विवाद के बाद नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने विधानसभा चार के प्रभारी विरेंद्र शेड़गे को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा था, लेकिन आज तक जवाब नहीं दिया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष का नाम लेकर दिया था नोटिस
उल्लेखनीय है कि संघ के कार्यकर्ता और विरेंद्र शेड़गे के बीच हुए विवाद के बाद इस मामले में अन्नपूर्णा थाने में प्रकरण भी दर्ज हुआ था। मामला इतना बढ़ गया संघ के दबाव में आकर नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने 7 जून को एक नोटिस जारी किया। इसकी पहली लाइन में ही बोल्ड अक्षरों में लिखा था कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार आपको नोटिस दिया जा रहा है। विगत दिनों से आपका आचरण पार्टी की विचारधारा व पक्ष के अनुरूप नहीं आ रहा है। लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए आपको तत्काल भाजपा विधानसभा 4 के पदाधिकारी पद से हटाया जा रहा है। आप तीन दिन में अपनी स्थिति स्पष्ट करें अन्यथा आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा।
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गुरुवार शाम तक नहीं मिला जवाब
भाजपा कार्यालय के सूत्र बताते हैं गुरुवार शाम तक शेड़गे की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। यहां सवाल यह है कि अगर जवाब नहीं आया है तो नगर अध्यक्ष द्वारा अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
दबाब के बाद जारी किया नोटिस
बताया जाता है कि विवाद इतना बढ़ गया कि संघ के कई पदाधिकारियों ने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा से जवाब तलब कर लिया। संघ ने स्पष्ट कहा कि शेंडगे को छह साल के लिए पार्टी से निकाला जाए। इसके बाद सुमित मिश्रा ने नोटिस जारी किया है।
कुत्ते द्वारा गंदगी करने पर हुआ था विवाद
बताया जाता है कि कुत्ते के खाना खिलाने को लेकर यह विवाद हुआ था। नेता वीरेंद्र शेड़गे और आरएसएस स्वयंसेवक चेतन पवार के बीच विवाद उस समय शुरू हुआ, जब चेतन पवार भाजपा नेता के घर के बाहर एक कुत्ते को खाना खिला रहे थे। बताया जा रहा है कि वीरेंद्र शेडगे ने अपने घर के सामने कुत्ते को खाना न डालने की बात कही, जिस पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि इस दौरान भाजपा नेता वीरेंद्र शेडगे ने चेतन पवार के साथ मारपीट की। वहीं पुलिस ने चेतन के दोस्त की शिकायत पर विरेन्द्र शेडगे, गिरीश शेडगे, शानू उर्फ सौरभ दिघे, मनीष ईमालिया, प्रंशात सोनी, विधायक मालिनी गौड़ के पीए प्रणय चितौडा, अमित कोकाटे सहित अन्य पर हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में एफआईआर कराई है।
सीधे-सीधे गुटबाजी से जुड़ा है मामला
यह मामला प्रारंभिक तौर पर भाजपा की गुटबाजी से जुड़ा लगता है। बताया जाता है कि इस मामले में मालिनी गौड़ के पीए प्रणय चित्तौड़ा पर भी प्रकरण दर्ज हुआ है, जिनका कहना है कि वे उस दिन इंदौर में नहीं थे। प्रणय ने कहा कि वे दो दिन महेश्वर में थे, लेकिन उनका नाम झूठा फंसाया गया है। संघ के कार्यकर्ताओं के साथ ही विधानसभा चार से अदावत रखने वाले गुट भी सक्रिय हैं। पुलिस पर इतना दबाव बनाया गया कि मालिनी गौड़ के लोगों पर तो प्रकरण हो गया, लेकिन शेड़गे का सिर्फ आवेदन ही लिया गया।
अब दोनों पक्षों ने लगाया जोर
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि अब दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी ताकत लगा दी है। संघ के पदाधिकारियों के दबाव में विधायक मालिनी गौड़ के समर्थकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने को विधायक गुट भी प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रहा है। इसलिए दोनों ही गुटों द्वारा वरिष्ठ नेताओं तक बात पहुंचाई जा रही है। पिछले कुछ दिनों से दोनों ही तरफ से सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किए जा रहे हैं। फिलहाल ऐसा लग रहा है कि संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले को दबाने का फैसला कर लिया है।



