आखिर किस परिवहन मंत्री की शह पर एक मामूली आरक्षक ने दिया इतने बड़े घोटाले को अंजाम, सरकार की चुप्पी पर उठ रहे हैं सवाल

Date:

भोपाल। आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर कार्रवाई के इतने दिनों बाद भी सरकार की चुप्पी से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या कोई सोच सकता है कि बिना विभागीय मंत्री के सहयोग से कोई इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकता है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इस मामले में कई नाम लिए हैं और कांग्रेस लगातार हमला कर रही है, लेकिन भाजपा और सरकार का जो रुख है उससे साफ जाहिर है कि कुछ न कुछ जरूर है जिस पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने तो साफ-साफ पूर्व परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत का नाम लिया था। इसके साथ ही उन्होंने कई और नामों का खुलासा भी किया था और यही सारे नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास चिट्‌ठी में लिखकर भेजे थे। सरकार और भाजपा इसे विपक्ष का आरोप लगाकर खारिज कर रहे हैं। खुद गोविंद राजपूत ने भी इसे हल्के से लिया है, लेकिन भाजपा और सरकार को क्या यह नहीं सोचना चाहिए कि आखिर किस मंत्री की शह पर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया।

पटवारी ने किया लाल डायरी का जिक्र

इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार हमलावर हैं। अब उन्होंने दावा किया है कि छापेमारी के दौरान लोकायुक्त को एक लाल डायरी मिली है। उस डायरी में कोडवर्ड में कई रसूखदारों के नाम लिखे गए हैं। पटवारी ने सवाल उठाया कि आखिर एक कॉन्स्टेबल के पास इतना पैसा कैसे आया? कॉन्स्टेबल के पास एक डायरी थी, जिसमें नाम के पहले अक्षर के जरिए लोगों के नाम लिखे गए हैं कि यह पैसा कहां-कहां गया। वह डायरी लोकायुक्त के पास है। अब सवाल उठता है कि लोकायुक्त उस डायरी को बदलेंगे या रखेंगे?

मिश्रा ने कहा-कार्रवाई त्रुटिपूर्ण और संदेहास्पद

इस मामले में कांग्रेस मीडिया विभाग के पूर्व अध्यक्ष केके मिश्रा ने सौरभ शर्मा मामले में लोकायुक्त की जांच की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की है। मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि दलगत राजनीति से परे मप्र के एक सामान्य नागरिक के रूप में जब हम भोपाल में परिवहन विभाग के पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा के यहां लोकायुक्त पुलिस के छापे की कार्यवाही का सूक्ष्म अध्ययन करते हैं, तो यह स्पष्ट आभास होता है कि जल्दबाजी में की गई यह कार्यवाही पूरी तरह त्रुटिपूर्ण, संदेहास्पद है। इन आशंकाओं के बीच इस मसले की दो अन्य जांच एजेन्सियों में शामिल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग दोनों ही से मेरा सादर आग्रह है कि वे इस जांच की विस्तृत परिधि में लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई समुचित जांच को भी शामिल करें।

तीनों ए​जेसियों के छापे में 37 करोड़ नकदी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगियों के ठिकानों से 23 करोड़ रुपए की नकदी भी बरामद की है। ईडी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा चेतन सिंह गौर के नाम से 6 करोड़ रुपए की एफडी और सौरभ शर्मा के परिवार के सदस्यों और कंपनियों के नाम पर बैंकों में जमा 4 करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। ईडी के मुताबिक यहां से 50 लाख रुपए से अधिक की अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। खास बात है कि सोमवार को ईडी ने अपने प्रेस नोट में नकदी का जिक्र नहीं किया था। बल्कि 23 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति सौरभ के परिजनों और कई कंपनियों के नाम पर होने की बात कही थी। इस तरह देखें तो लोकायुक्त पुलिस, आयकर और ईडी की छापेमारी में सौरभ और उसके साथियों से 37 करोड़ रुपए की नकदी मिली है।

सवाल यह है कि सरकार चुप क्यों है?

इस पूरे मामले में सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। विपक्ष की बात छोड़ भी दें तो आम जनता के मन भी यही सवाल है कि आखिर बिना विभागीय मंत्री के सपोर्ट के इस तरह का घोटाला नहीं हो सकता। सौरभ शर्मा के यहां से जो कुछ मिलता जा रहा है, उससे साफ है कि यह कोई एक-दो वर्ष का काम नहीं होगा। ऐसे में अगर घोटाले की तह तक जाना है तो सरकार को अपने सभी पुराने परिवहन मंत्रियों की जांच करानी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

अब उज्ज्वला योजना के सिलेंडरों में कटौती, एक साल में सिर्फ चार सिलेंडर ही मिलेंगे

केंद्र सरकार ने अब उज्जवला योजा के तहत दिए जाने वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या में कटौती कर दी है। अब योजना के तहत दिए जाने वाले सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या घटाकर चार कर दी है।