ट्रंप के टैरिफ पर जयशंकर की प्रतिक्रिया: भारत का लक्ष्य साल के अंत तक अमेरिका से व्यापार समझौता
नई दिल्ली की रणनीति: अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में लगाए गए इन शुल्कों का प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, भारत ने स्थिति से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर ली है, जिसके तहत इस वर्ष के अंत तक वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) अंतिम रूप दिया जाएगा।
भारत, व्यापार समझौते के करीब पहुंचने वाला पहला देश
जयशंकर ने बताया कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भारत शायद पहला और एकमात्र देश है जो अमेरिका के साथ इस स्तर तक व्यापारिक सहमति तक पहुंचा है। यह बयान अमेरिका की ओर से भारत सहित पाँच देशों पर टैरिफ लागू किए जाने के कुछ घंटों बाद आया। इन टैरिफों से वैश्विक व्यापार में भारी व्यवधान और आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ी है।
जयशंकर ने कहा:
“हम नहीं जानते कि इसका क्या असर होगा, इसलिए हमारी रणनीति स्पष्ट है – इस वर्ष के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना।”
ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापार वार्ता तेज़ करने की तैयारी
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की योजना जल्द ही अमेरिका के साथ गंभीर और ठोस व्यापार वार्ता शुरू करने की है। उन्होंने याद दिलाया कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच बैठक के बाद, दोनों देशों ने 2025 तक व्यापार समझौते की पहली किस्त पर बातचीत का एलान किया था।
व्यापार वार्ता का इतिहास और बाइडन प्रशासन की भूमिका
जयशंकर ने कहा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी व्यापार समझौते पर बातचीत की गई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया। वहीं बाइडन प्रशासन के दौरान, अमेरिका ने द्विपक्षीय समझौतों से दूरी बनाकर IPEF (इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क) जैसे बहुपक्षीय प्रयासों को प्राथमिकता दी।
IPEF और भारत की प्राथमिकता
जयशंकर ने बताया कि IPEF की शुरुआत मई 2022 में जो बाइडन द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति-शृंखला लचीलापन और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना था। हालांकि, भारत के लिए अमेरिका के साथ सीधा द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब भी प्राथमिकता में है।
जयशंकर ने निष्कर्ष में कहा:
“भारत के दृष्टिकोण से, अमेरिका के साथ द्विपक्षीय रूप से काम करना कभी भी नकारात्मक नहीं रहा है। यह लंबे समय से हमारा उद्देश्य रहा है और अब यह रणनीतिक प्राथमिकता बन चुका है।”
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