सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपीएटी पर्चियों की 100% गिनती की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग को इलेक्ट्रॉनिक गिनती के साथ-साथ वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) पर्चियों की 100 प्रतिशत हाथों से गिनती करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
👉 यह भी पढ़ें:
- मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, नाम वापसी की आखिरी तारीख आज
- इश्क करो पार्टी’ से राजनीति में एंट्री! पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू का बड़ा दांव, क्या बदल जाएगा राजनीतिक नैरेटिव?
- विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से भी एशियन गेम्स के ट्रायल में शामिल होने की मिली मंजूरी
- आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: खाना खिलाने वालों की भी तय होगी जिम्मेदारी
- टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कोर्ट ने मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को सही ठहराया
- सुप्रीम कोर्ट में बोले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा-मुझे गिरफ्तार कर जलील करने की जरूरत नहीं
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ दिल्ली उच्च न्यायालय के 12 अगस्त, 2024 के फैसले के खिलाफ हंस राज जैन की याचिका पर विचार कर रही थी। सीजेआई ने अपील खारिज करते हुए कहा, “हमें (दिल्ली हाई कोर्ट के) फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नहीं मिला। विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।”
सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत की एक पूर्व पीठ पहले भी इसी प्रकार के मुद्दों पर फैसला दे चुकी है, और इसे बार-बार नहीं उठाया जा सकता।
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के डेटा का वीवीपीएटी रिकॉर्ड के साथ 100 प्रतिशत मिलान करने की मांग वाली याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ईवीएम एक सुरक्षित, सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रणाली है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए हंस राज जैन की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका को भी ठुकरा दिया।
हंस राज जैन ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि वह भविष्य में वीवीपीएटी प्रणाली के ऐसे प्रोटोटाइप का उपयोग करे, जिसमें प्रिंटर को खुला रखा जाए और मुद्रित मतपत्र, जो कट कर प्रिंटर से बाहर गिरता है, उसे मतदाता मतदान केंद्र छोड़ने से पहले पीठासीन अधिकारी को सौंपने से पहले सत्यापित कर सके। साथ ही उन्होंने यह मांग भी रखी कि ईवीएम की इलेक्ट्रॉनिक गिनती के साथ-साथ वीवीपीएटी पर्चियों की 100 प्रतिशत गिनती अनिवार्य की जाए।



