अब सीबीआई करेगी डिजिटल अरेस्ट स्कैम की जांच, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-ऐसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसे गंभीर मामलों की जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन घोटालों पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। सीबीआई अब इन्वेस्टमेंट और पार्टटाइम जॉब के नाम पर होने वाले स्कैम की भी जांच करेगी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अगर बैंक खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट स्कैम के लिए हुआ है, तो सीबीआई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच करने की इजाजत दी है और जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद लेने को कहा है। कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों से भी जांच में पूरा सहयोग करने को कहा है। साथ ही आरबीआई से यह पता लगाने में मदद मांगी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसे टूल का इस्तेमाल ऐसे खातों की पहचान करने और अपराध से कमाए पैसे को फ्रीज करने में कैसे किया जा सकता है।

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डिजिटल अरेस्ट एक तरह का साइबर फ्रॉड है, जिसमें धोखेबाज खुद को पुलिस या इंफोर्समेंट ऑफिसर बताकर लोगों को ऑडियो या वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को डराकर और जल्दी करने को कहकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। वे झूठा दावा करते हैं कि पीड़ित को गिरफ्तार कर लिया गया है और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें पैसे देने होंगे। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 2024 में हीडिजिटल अरेस्टऔर इससे जुड़े साइबर अपराधों के 1,23,672 मामले सामने आए हैं। यह दिखाता है कि यह समस्या कितनी बड़ी हो गई है।

पढ़े-लिखे लोग हो रहे हैं शिकार

अधिकारियों ने साफ किया है किडिजिटल अरेस्टजैसा कोई कानूनी शब्द नहीं है। इसके बावजूद, पढ़ेलिखे लोग भी इन घोटालों का शिकार हो रहे हैं। धोखेबाज अक्सर पीड़ितों से कहते हैं कि उनके नाम से एक पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें ड्रग्स, नकली दस्तावेज या कोई और गैरकानूनी सामान है। कभीकभी वे कहते हैं कि पीड़ित के किसी रिश्तेदार या करीबी को गिरफ्तार किया गया है या वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हैं। फिर वे मामला रफादफा करने के नाम पर पैसे मांगते हैं।

राज्य सरकारों को भी दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें साइबर क्राइम सेंटर जल्दी स्थापित करें और अगर कोई रुकावट आए तो राज्य कोर्ट को बताएं। आईटी नियमों के तहत अधिकारियों को निर्देश जाए कि वे साइबर अपराधों के लिए अलगअलग राज्यों के एफाईआर में बरामद सभी फोन का मोबाइल फोन डेटा स्टोर करें। कोर्ट ने सभी राज्यों और यूटी को निर्देश दिया है कि जहां भी आईटी एक्ट 2021 के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है, सभी सीबीआई को सौंपा जाए।

Ardhendu Bhushan
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Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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