भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही विपक्ष ने छिंदवाड़ा के कफ सिरप मामले को लेकर माहौल गरमा दिया। इंदौर एमवाय अस्पताल में बच्चों को चूहों के कुतरने पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। एक कांग्रेस विधायक पूतना बनकर विधानसभा पहुंचीं। कांग्रेस विधायक बच्चों के पुतले लेकर प्रदर्शन करने लगे। इसके साथ ही एसआईआर का मामला भी उठा।
विधानसभा में शून्य काल के दौरान कांग्रेस ने हंगामा किया। सत्र की कम अवधि को लेकर उठाए सवाल। कहा जब विधायक जनहित के मुद्दे उठा ही नहीं सकते हैं तो फिर सत्र बुलाने का क्या मतलब। आसंदी के सामने आकर की नारेबाजी। कांग्रेस ने एसआईआर में गड़बड़ी और काम के दबाव में बीएलओ की मौत का मुद्दा भी उठाया। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने 8 बीएलऔ की मौतों का जिक्र किया तो मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति लेते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष गरिमा का ध्यान रखें। पहले पनेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश में बच्चों पर बढ़ते अत्याचार, कफ सिरप पीने से हुई मासूम बच्चों की मौत और सरकारी उपेक्षा के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस विधायक सेना पटेल पूतना के रूप में गले में कफ़ सीरप की बोतल की माला पहने प्रदर्शन करती नज़र आई। अनोखे सांकेतिक प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने हाथों में गुड्डा गुड्डी लिए बच्चों की मौत का शोक मनाया।
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रामेश्वर शर्मा ने उठाया भावांतर योजना पर सवाल
हामल की हुजूर विधानसभा के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भावांतर योजना पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हम भावांतर के सही रेट नहीं बता पा रहे हैं। यह हमारी गलती है। हमारे अधिकारियों के साथ–साथ हम भी किसानों को सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। कृषि मंत्री और राजस्व मंत्री से आग्रह है कि बीमा कंपनी के अफसरों को निर्देश दिए जाएं कि अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और अनावृष्टि की स्थिति में किसानों के खेत में जाएं और किसानों के नुकसान का आकलन कर कार्रवाई करें। भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि भावांतर योजना किसानों को भ्रमित करने वाली योजना है। सोयाबीन की खरीदी नहीं हो रही है। अतिवृष्टि से हुए नुकसान से किसान परेशान हैं। भावांतर नहीं मिल रहा है जो मॉडल रेट तय हो रहे, उसका पैसा किसानों को नहीं मिल रहा।
इस बार विधानसभा पहुंचे 1497 सवाल
विधानसभा सचिवालय में 751 तारांकित और 746 अतारांकित प्रश्नों को मिलाकर 1497 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। ध्यानाकर्षण की 194, स्थगन प्रस्ताव की 06, अशासकीय संकल्प की 14, शून्यकाल की 52, नियम-139 की 02 सूचनाएं जबकि 15 याचिकाएं मिली हैं। 2 शासकीय विधेयक भी प्राप्त हुए हैं।


