नई दिल्ली। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की मंजूरी मिल गई है। ये सांसद टीएमसी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए थे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंजूरी देते हुए काकोली घोष दस्तीदार को संसद में NCPI के चीफ व्हिप और सुदीप बंद्योपाध्याय को फ्लोर लीडर के रूप में भी मान्यता दे दी है।
एनडीए की सहयोगी पार्टी बनी NCPI
लोकसभा स्पीकर की तरफ से NCPI सांसदों के अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी और नेताओं को मान्यता मिलने के बाद अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया देश की संसद के आने वाले मानसून सत्र में केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए के दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी दल के रूप में अपनी नई शुरुआत करने जा रही है। एनडीए में भाजपा के 239 सांसदों के बाद NCPI 20 सांसदों के समर्थन के साथ गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी दल है।
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टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने किया विरोध
टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर के इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि 20 बागी सांसदों को अलग सीट देने का फैसला उम्मीद के मुताबिक नहीं था। स्पीकर के पास बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं पहले से लंबित हैं। इन पर फैसले लेने से पहले कोई कार्रवाई नहीं की गई। बनर्जी ने कहा कि हमने स्पीकर के सामने दल-बदल के आधार पर अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाएं पहले ही दायर कर दी हैं। ऐसे में उन 20 याचिकाओं पर किसी तरह का फैसले किए बिना स्पीकर की तरफ से उन्हें (बागी सांसद) मान्यता देना उम्मीद के मुताबिक नहीं था।
सर्वदलीय बैठक में अन्य दलों ने किया था विरोध
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने टीएमसी के बागी नेताओं सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार को सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का आमंत्रण दिया। इसके विरोध में विपक्षी नेताओं ने बैठक शुरू होने के तुरंत बाद बाहर निकलकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आप, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना समेत पूरे विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया है।



