अब तो मान लो संजू भिया, भाजपा में नहीं चलने वाली आपकी दुकान, राजेंद्र शुक्ला तो पार्टी के पुराने थे, आपका नंबर तो आने से रहा

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इंदौर। भाजपा में हाल ही में हुई एक नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला की विरासत को आखिर कौन संभालेगा? इस परिवार में राजेंद्र शुक्ला पहले से ही भाजपा में थे। एक बार चुनाव भी लड़े, लेकिन संजय शुक्ला शुरू से ही कांग्रेसी रहे। संजय शुक्ला, कैलाश विजयवर्गीय से हार के बाद अपनी बंद दुकान चलाने भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन पार्टी में उनको भाव नहीं मिला। संजय शुक्ला पद मिलने का इंतजार करते रह गए, लेकिन नंबर लगा राजेंद्र शुक्ला का।
हाल ही में राजेंद्र शुक्ला को भारत सरकार के लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने कयर बोर्ड ने बिजनेस डेवलपमेंट एडवाइजर बनाया है। हालांकि लंबे समय से राजेंद्र शुक्ला की खोज-खबर भाजपा ने नहीं ली थी, जबकि वे भाजपा में कई पदों पर रहे हैं। वे मंडल अध्यक्ष, भाजपा उपाध्यक्ष, खेल प्रकोष्ठ आदि में विभिन्न पदों पर रहने के साथ ही भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा। विधानसभा में जीत हासिल नहीं हुई, इसके बाद से राजेंद्र शुक्ला हासिए पर थे।

भाजपा ने संजय शुक्ला को कभी नहीं दिया भाव

विधानसभा एक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से बुरी तरह हार के बाद संजय शुक्ला काफी समय तक अज्ञातवास में थे। न किसी आयोजन में और न ही सार्वजनिक रूप से कहीं नजर आ रहे थे। विधानसभा चुनाव में विजयवर्गीय को खूब बुरा-भला कहा था। इसलिए यह डर भी था कि कहीं धंधे-पानी में दिक्कत न आ जाए। यही कारण है कि एक दिन भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने आका सुरेश पचौरी के साथ भाजपा में शामिल हो गए। संजय शुक्ला भाजपा में आ तो गए, लेकिन उन्हें बिल्कुल ही भाव नहीं मिला। न संगठन में कोई पद मिला न ही निगम-मंडल में कोई स्थान। इतना ही नहीं इंदौर में होने वाले भाजपा के आयोजनों में भी उन्हें नहीं पूछा गया।

भागीरथपुरा कांड के बाद जग रही थी उम्मीद

लंबे समय से कोशिशें विफल होने के बाद संजय शुक्ला हताश हो रहे थे, इसी बीच भागीरथपुरा कांड सामने आया। इस मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को बुरी तरह घिरता देख संजय शुक्ला की उम्मीदों ने फिर से पंख लगाने शुरू कर दिए हैं। उन्हें पता है कि प्रदेश नेतृत्व से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक इस मामले और इसके बाद मंत्री विजयवर्गीय के रवैये से सख्त नाराज है।

लोग कह रहे-अब तो ढूल गया रायता

कैलाश विजयवर्गीय को घिरता देख संजय शुक्ला को बंद दुकान चालू होने की उम्मीद जग गई थी, लेकिन राजेंद्र शुक्ला की नियुक्ति ने उस पर रायता ढोल दिया। भाजपा के नेता ही कह रहे कि एक ही परिवार में दो-दो पद तो मिल नहीं सकता। इससे भी बड़ी बात कि इस नियुक्ति ने यह भी बता दिया कि भाजपा ने असली भाजपाई किसको माना। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि भाजपा आलाकमान को पता है कि अभी तो संजय शुक्ला अपनी दुकान बचाने के लिए भाजपा में शामिल हुए हैं, चुनाव आते ही वे कांग्रेस में पलटा मार सकता हैं।

मोदीजी से मदद मांगकर नजरों में चढ़ने की कोशिश

हाल ही में दुबई से फर्जी वीडियो दिखाने के मामले में संजय शुक्ला की पूरे देश में किरकिरी हुई है। उन्होंने किसी गोदाम में लगी आग को दिखाकर पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से बचाने की अपील की। उनके वीडियो को दुबई के लोगों ने ही फर्जी बताया और कहा कि वहां के हालात अच्छे हैं। दुबई में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो जारी कर संजय शुक्ला के वीडियो को न केवल पूरी तरह नकारा, बल्कि वहां के वर्तमान हालात भी दिखाए। यह वीडियो संजय शुक्ला ने मौके पर चौका लगाने के लिए जारी किया था, लेकिन बाउंड्री पर कैच पकड़ लिया गया था।

होली मनाकर भी चर्चा में आए

पिछले साल दिसंबर के अंत में विधानभा एक के भागीरथपुरा में लोगों के गंदे पानी से हुई मौतों का सिलसिला शुरू हुआ था। जो जनवरी-फरवरी तक जारी रहा। इस पूरे घटनाक्रम में संजय शुक्ला कहीं मौजूद नजर नहीं आए, जबकि पूरा शहर दुखी था और आज भी है। यही वजह है कि इस बार महापौर पुष्यमित्र भार्गव और कलेक्टर शिवम वर्मा ने होली का आयोजन नहीं रखा। भाजपा के अधिकांश नेताओं ने ऐसा ही किया, लेकिन विधानसभा एक के पूर्व विधायक संजय शुक्ला को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने किसी की परवाह किए बिना कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ जमकर होली मनाई।

गोलू शुक्ला की बराबरी की कोशिश

शुक्ला परिवार से गोलू शुक्ला को पिछले कुछ समय में सबसे ज्यादा सफलता मिली है। वे भी शुरू से ही भाजपा का दामन थाम कर चलते रहे। इसीलिए उन्हें भाजपा ने कई पदों से नवाजा और विधानसभा का टिकट भी मिला। आज गोलू शुक्ला जो भी अपने मेहनत के दम पर हैं। संजय शुक्ला उनसे बराबरी की कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते। भाजपा में ही चर्चा इस बात की है कि संजय शुक्ला अपनी दिशा ही नहीं तय कर पाते। यही वजह है कि वे अपनी टीम भी नहीं खड़ी कर पाए।

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