एम. के. स्टालिन ने सीजेपी प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि असहमति कोई अपराध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में आवाज दबाना गलत है और यह व्यवस्था तभी मजबूत रहती है जब लोगों को अपनी बात कहने की आज़ादी हो।
सीजेपी प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त की इस्तीफे की मांग
10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को बहाल करना था। सीजेपी ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक असहमति जताने का माध्यम बताया।
👉 यह भी पढ़ें:
- ममता बनर्जी ने CJP समर्थन में मुंह पर बैंड-एड लगाकर जताया विरोध
- राहुल गांधी बोले: राष्ट्रपति ने वोट चोरी का खंडन नहीं किया, सबूत मांगे
- CEC ज्ञानेश कुमार सहित चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को SC में चुनौती, कई सवाल उठाए
- राहुल गांधी का दावा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा
- दिल्ली में SIR पर विरोध, राहुल-प्रियंका गांधी हिरासत में लिए गए
- ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, सुनवाई की तारीख तय हुई
स्टालिन ने इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा गैर-समझौतावादी है और चुनाव आयोग के संस्थागत ढांचे को सुधारना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी जीवित रह सकता है जब उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनी रहे।

स्टालिन की आपातकाल से तुलना और पुलिस कार्रवाई की निंदा
एम. के. स्टालिन ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की तुलना 1975-77 के आपातकाल से की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। यह कार्रवाई उन्हें अपने आपातकाल के अनुभव की याद दिलाती है।
उन्होंने मांग की कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में हिरासत में लिए गए सभी राजनीतिक नेताओं, छात्रों और युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए। स्टालिन ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करें।
तमिलनाडु की टीवीके सरकार पर स्टालिन की तीखी टिप्पणी
स्टालिन ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ टीवीके सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि टीवीके भाजपा के विस्तार के रूप में कार्य कर रही है और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है।
यह आरोप उस राजनीतिक पृष्ठभूमि में आया है जहां अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद टीवीके ने अपनी स्थिति मजबूत की है और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है। वहीं, डीएमके ने इंडिया ब्लॉक से दूरी बनाए रखी है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लिए गए नेताओं का हाल
दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। प्रदर्शन से पहले ही सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष राणा, सौरव दास और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, बावजूद इसके प्रदर्शनकारी वहां एकत्र होने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों में रोष है।
लोकतंत्र में असहमति जताने का महत्व
स्टालिन ने जोर देकर कहा कि असहमति जताना लोकतंत्र का अधिकार है, न कि अपराध। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र उन आवाजों को दबाकर जीवित नहीं रह सकता, जो उसकी रक्षा के लिए सामने आती हैं।
इस संदर्भ में, सीजेपी का प्रदर्शन और स्टालिन का समर्थन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। यह घटनाक्रम देश में राजनीतिक विमर्श और अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
आगे की संभावनाएं और राजनीतिक माहौल
इस प्रदर्शन और उसके समर्थन से राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ने की संभावना है। मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठने से चुनाव प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
साथ ही, युवा और छात्र वर्ग के बीच राजनीतिक चेतना बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं, जो भविष्य में और अधिक सक्रियता ला सकता है। सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की आवश्यकता इस वक्त और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।



