देशभर में मानसून को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है और अब इसके केरल पहुंचने में करीब एक सप्ताह की देरी होने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून पिछले कई दिनों से श्रीलंका के तटीय क्षेत्र के आसपास ही ठहरा हुआ है और फिलहाल इसके तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
बारिश कम, खेती पर संकट के बादल
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मौसम विभाग ने अपने ताज़ा दीर्घकालिक अनुमान में बताया है कि इस वर्ष देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। संशोधित अनुमान के मुताबिक मानसून सीजन में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। इससे खरीफ फसलों की बुआई और कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थितियां तेजी से विकसित हो रही हैं। जून तक इसके प्रभाव की संभावना 82 प्रतिशत और जुलाई-अगस्त तक 90 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। अल-नीनो के कारण आमतौर पर भारत में वर्षा कम होती है।
धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की खेती विशेष रूप से प्रभावित हो सकती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, विदर्भ और तेलंगाना जैसे कृषि-निर्भर राज्यों में किसानों की चिंता बढ़ गई है।
आंधी-तूफान का कहर, 44 लोगों की मौत
जहां एक ओर मानसून कमजोर पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तर और पूर्वी भारत में आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है।
- उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने और विभिन्न हादसों में 28 लोगों की मौत हुई।
- बिहार में वज्रपात और तेज बारिश से 9 लोगों की जान गई।
- पश्चिम बंगाल में कालबैसाखी तूफान के कारण 7 लोगों की मौत हो गई।
कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और जनजीवन प्रभावित हुआ है।
कई राज्यों में लू का अलर्ट
कम बारिश का असर तापमान पर भी पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार जून में देश के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, गुजरात, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में सामान्य से अधिक दिनों तक लू चल सकती है। महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिल सकता है।



