देवा पारदी मौत केस में TI संजीत मावई को इंदौर जेल से मिली जमानत की खबर से इस विवादित मामले में बड़ी प्रगति हुई है। यह जमानत पुलिस कस्टडी में हुई मौत के गंभीर आरोपों के बीच मिली है।
देवा पारदी मौत केस की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोपी
15 जुलाई 2024 को मध्य प्रदेश के गुना जिले के म्याना थाने में 25 वर्षीय देवा पारदी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। चोरी/डकैती के एक मामले में पूछताछ के लिए देवा और उसके चाचा गंगाराम को हिरासत में लिया गया था। इस घटना में तत्कालीन थाना प्रभारी संजीत सिंह मावई और उपनिरीक्षक उत्तम सिंह कुशवाहा मुख्य आरोपी बनाए गए थे।
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मजिस्ट्रियल जांच में मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई बताई गई थी। FIR दर्ज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और सीबीआई की गिरफ्तारी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई थी क्योंकि आरोपियों को पकड़ने में देरी हो रही थी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में सीबीआई ने फरार आरोपी TI संजीत मावई को शिवपुरी जिले के बदरवास थाने में गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस का सहयोग भी शामिल था।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल इंदौर भेजा गया।
इंदौर जेल से TI संजीत मावई को जमानत क्यों मिली?
लगभग एक साल की न्यायिक हिरासत के बाद शुक्रवार को इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत ने TI संजीत मावई को जमानत दे दी। जमानत मिलने के पीछे अदालत ने अभियोजन पक्ष की तर्क-वितर्क और सबूतों का अध्ययन किया। दस्तावेजों की देरी के कारण वे तुरंत जेल से बाहर नहीं आ सके, लेकिन आज दोपहर तक उनकी रिहाई की संभावना है।
यह जमानत देवा पारदी मौत केस में एक महत्वपूर्ण विकास मानी जा रही है, जो न्याय प्रक्रिया की गति को दर्शाती है।
पुलिस कस्टडी में मौत के बाद पारिवारिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
देवा पारदी की मौत के बाद पारदी समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया था। मृतक की चाची और होने वाली दुल्हन ने आत्मदाह का प्रयास किया था। महिलाओं ने जिला अस्पताल और कलेक्ट्रेट में भी प्रदर्शन किया था। इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और कस्टडी में हिरासत के दौरान सुरक्षा की गंभीर बहस छेड़ी।
सामाजिक दबाव और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण जांच में तेजी आई और आरोपी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज हुई।
आम जनता पर देवा पारदी मौत केस का असर
पुलिस कस्टडी में मौत की घटनाएं आम जनता के बीच पुलिस प्रशासन के प्रति अविश्वास को बढ़ाती हैं। इस मामले ने मध्य प्रदेश में पुलिस सुधार और मानवाधिकार संरक्षण की मांग को और बल दिया है।
जमानत मिलने के बावजूद, न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता और दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद आम लोगों में बनी हुई है। यह मामला भविष्य में पुलिस हिरासत की जवाबदेही के लिए मिसाल बन सकता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित परिणाम
जमानत मिलने के बाद भी TI संजीत मावई पर लगे आरोप कायम हैं। मामले की सुनवाई जारी रहेगी और अदालत आरोपों की गहराई से जांच करेगी। यदि अभियोजन पक्ष मजबूत सबूत पेश कर पाता है तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल, न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और इस मामले से जुड़ी अगली सुनवाई पर देश की नजर बनी रहेगी।



