सत्तन का सरकार पर हमला अवैध नशे के कारोबार में शासन की मिलीभगत? इस विवादास्पद मुद्दे ने इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 के कई इलाकों में हलचल मचा दी है। स्थानीय निवासी और भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन ने इस समस्या पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
अवैध नशे के कारोबार को लेकर सत्तन का सरकार पर आरोप
सत्तन का सरकार पर हमला मुख्य रूप से राज्य की शराब नीति और कार्यप्रणाली को लेकर है। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद नशा और शराब बेचती है, तो अवैध कारोबारियों के हौसले बढ़ते हैं। इसके चलते नशे के तस्करों को बढ़ावा मिलता है और प्रशासन की मिलीभगत सामने आती है।
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सत्तन ने यह भी आरोप लगाया कि बड़े माफियाओं को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिससे केवल छोटे-प्यादों पर कार्रवाई होती है।

स्थानीय पुलिस से मुलाकात और ज्ञापन सौंपा
सत्तन गुरु ने स्थानीय पार्षद मनोज मिश्रा और क्षेत्र के निवासियों के साथ मिलकर डीसीपी (जोन-1) नरेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की। इसमें उन्होंने नशे की बिक्री रोकने और प्रमुख तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
डीसीपी ने प्रभावित इलाकों में सर्चिंग तेज करने और कड़े दंडात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
पुलिस प्रशासन की नाकामी और सामाजिक दृष्टि से विफलता
सत्तन ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन सामाजिक दृष्टि से पूरी तरह से फेल हो रहा है। उनका कहना है कि पुलिस नशे के कारोबार को रोकने में असमर्थ है। इस विफलता के कारण रिहायशी इलाके नशे के अड्डे बन गए हैं।
यह स्थिति आम जनता के लिए खतरा बन रही है और स्थानीय लोग इससे त्रस्त हैं।
क्षेत्रीय विधायक और मंत्री के चुनावी वादे याद दिलाए गए
ज्ञापन सौंपते समय पार्षद मनोज मिश्रा ने विधायक व कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा चुनावी समय दिए गए ‘क्षेत्र को नशामुक्त करने’ के वादे को याद दिलाया।
हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं दिखाई दिया है, जिससे स्थानीय जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
अवैध नशे के कारोबार का आम जनता पर प्रभाव
अवैध नशे के कारोबार से आम जनता की सुरक्षा खतरे में है। नशे की खुली बिक्री से युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है और सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं।
सत्तन का सरकार पर हमला इस बात को उजागर करता है कि प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को हल करने में गंभीरता नहीं दिखाई है।
आगे की संभावनाएं और प्रशासन की जिम्मेदारी
डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के आश्वासन के बावजूद, प्रभावी कार्रवाई के लिए निरंतर निगरानी और कठोर कदम आवश्यक हैं।
सरकार को नशे के खिलाफ स्पष्ट नीति बनाकर उसे लागू करना होगा ताकि आम जनता का विश्वास बहाल हो सके और अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके।



