इंदौर। यशवंत क्लब में मास्टर प्लान और निर्माण परियोजना को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। क्लब के ज्वाइंट सेक्रेटरी तेजवीर जुनेजा सहित प्रबंधन समिति के चार सदस्यों की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर कंस्ट्रक्शन कमेटी ने बिंदुवार जवाब दिया है। कमेटी ने कहा है कि मास्टर प्लान और कमेटी के अधिकारों को क्लब की विशेष आमसभा (EOGM) में सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। ऐसे में पूर्व में स्वीकृत प्रस्तावों और कमेटी की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज कर परियोजना रोकने की मांग स्वीकार्य नहीं है।
सदस्यों को दी गई थी मास्टर प्लान की जानकारी
13 अक्टूबर 2026 को दिए गए जवाब में कंस्ट्रक्शन कमेटी ने कहा कि 6 अप्रैल 2025 की EOGM के मिनट्स का समुचित अध्ययन किए बिना आपत्तियां उठाना उचित नहीं है। कमेटी के मुताबिक, सदस्यों को मास्टर प्लान के बारे में पहले ही विस्तृत जानकारी दी गई थी और उस पर चर्चा के बाद हाउस ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। कमेटी ने यह भी कहा कि क्लब के विकास कार्यों को रोकने या अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के लिए ठोस तकनीकी अथवा नियामकीय आधार होना चाहिए।
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चार-पांच साल में पूरा होना है मास्टर प्लान
कंस्ट्रक्शन कमेटी के जवाब के अनुसार, 6 अप्रैल 2025 की विशेष आमसभा में मास्टर प्लान को पूरा करने में लगभग चार से पांच साल लगने की संभावना बताई गई थी। इसी उद्देश्य से सात सदस्यों की कंस्ट्रक्शन कमेटी गठित करने और परियोजना पूरी होने तक उसे जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव रखा गया था। कमेटी ने EOGM के मिनट्स का हवाला देते हुए कहा कि निर्माण संबंधी निर्णयों में उसकी भूमिका और अधिकार पहले से निर्धारित हैं। मिनट्स में यह प्रावधान भी दर्ज है कि कंस्ट्रक्शन कमेटी के निर्णय सभी के लिए अंतिम और बाध्यकारी होंगे। कमेटी का तर्क है कि यह व्यवस्था किसी अनौपचारिक चर्चा का हिस्सा नहीं, बल्कि हाउस की कार्यवाही में दर्ज प्रस्ताव का हिस्सा है। जवाब में यह भी कहा गया कि स्वीकृत मास्टर प्लान में बदलाव नहीं करने संबंधी निर्णय हाउस की कार्यवाही में दर्ज है। इसलिए कमेटी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन क्लब के संविधान और लागू नियमों के अनुरूप कर रही है।
आपत्ति करने वाले पांचों सदस्य EOGM में मौजूद थे
कंस्ट्रक्शन कमेटी ने अपने जवाब में एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि 7 अक्टूबर 2026 के आपत्तिपत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पांचों सदस्य 6 अप्रैल 2025 की EOGM में उपस्थित थे। इनमें से दो सदस्य उस समय की प्रबंधन समिति में भी शामिल थे। कमेटी के मुताबिक, उस आमसभा में मास्टर प्लान प्रस्तुत किया गया, उस पर विचार-विमर्श हुआ और सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई। निर्माण समिति के गठन और उसे परियोजना पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था। कमेटी ने कहा कि निर्णय किसी की जानकारी के बिना नहीं लिए गए थे, बल्कि संबंधित बैठक में उपस्थित सदस्यों के सामने प्रस्ताव रखे गए थे। इसी आधार पर कमेटी ने सवाल उठाया है कि जब योजना पर पहले ही चर्चा हो चुकी है और हाउस ने उसे मंजूरी दी है, तो निर्माण कार्य आगे बढ़ने के समय पूरी परियोजना रोकने की मांग क्यों की जा रही है।
प्रबंधन समिति सदस्य भी निभाएं जिम्मेदारी
कंस्ट्रक्शन कमेटी ने ज्वाइंट सेक्रेटरी और प्रबंधन समिति के सदस्यों की भूमिका पर भी टिप्पणी की है। जवाब में कहा गया कि किसी पदाधिकारी का दायित्व केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करना, पहले लिए गए निर्णयों को समझना और क्लब के संस्थागत हितों की रक्षा करना भी है। कमेटी का कहना है कि पद के साथ अधिकार आते हैं, लेकिन उनके साथ उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है। पदाधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे क्लब के संविधान, जनरल बॉडी के निर्णयों और हाउस द्वारा विधिवत पारित प्रस्तावों का सम्मान करें। जवाब में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रस्ताव की व्याख्या या कमेटी के अधिकारों को लेकर संदेह है, तो उसका समाधान संबंधित दस्तावेजों और क्लब के नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए। कमेटी के काम में बिना ठोस आधार बाधा डालना उचित नहीं होगा।
टेंडर प्रक्रिया रोकने की मांग पर भी उठाए सवाल
कंस्ट्रक्शन कमेटी ने आपत्तिपत्र में टेंडर की अवधि, प्रचार-प्रसार, तकनीकी दस्तावेजों, बिड खोलने की प्रक्रिया, वित्तीय पहलुओं और BOQ (बिल ऑफ क्वांटिटीज) को लेकर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया है। कमेटी ने कहा कि पारदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता, वित्तीय अनुशासन और तकनीकी उपयुक्तता का महत्व उसे पूरी तरह समझ में है। यदि किसी विशेष प्रक्रिया या तकनीकी विषय में वास्तविक कमी है, तो संबंधित दस्तावेजों और ठोस तथ्यों के साथ आपत्ति प्रस्तुत की जा सकती है। कमेटी ऐसे विशिष्ट और तथ्यात्मक सवालों पर विचार करने के लिए तैयार है। कमेटी ने आगाह किया कि किसी स्पष्ट नियमगत उल्लंघन की पहचान किए बिना पूरी टेंडर प्रक्रिया रोकने की मांग सही नहीं है।
2 अक्टूबर की बैठक का भी दिया हवाला
जवाब में 2 अक्टूबर 2026 को हुई कंस्ट्रक्शन कमेटी की बैठक का उल्लेख भी किया गया है। कमेटी के अनुसार, इस बैठक में परियोजना की कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया और उपलब्ध जानकारी के आधार पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि परियोजना को आगे बढ़ाया जाए। कमेटी ने कहा कि वह वास्तविक तकनीकी आपत्तियों और उचित सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है, लेकिन केवल आपत्तियां उठाने के आधार पर हाउस के सर्वसम्मत निर्णय को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
क्लब का विकास प्राथमिकता
कंस्ट्रक्शन कमेटी ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समूह से विवाद करना नहीं, बल्कि हाउस द्वारा स्वीकृत मास्टर प्लान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाना और क्लब को प्रस्तावित विकास कार्यों का लाभ उपलब्ध कराना है। कमेटी ने यह भी कहा कि उसमें अनुभवी पूर्व पदाधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, इंजीनियर, प्रतिष्ठित व्यवसायी और वित्तीय एवं लेखा क्षेत्र का अनुभव रखने वाले सदस्य शामिल हैं। सभी सदस्य क्लब के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से परिचित हैं।
EOGM के मिनट्स का दोबारा अध्ययन करें सदस्य
कंस्ट्रक्शन कमेटी ने पांचों पदाधिकारियों से कहा है कि वे 6 अप्रैल 2025 की EOGM के मिनट्स और कमेटी के गठन तथा अधिकारों से जुड़े प्रस्तावों का दोबारा अध्ययन करें। यदि कोई विशिष्ट तकनीकी या प्रक्रियागत आपत्ति है, तो उसका स्पष्ट विवरण और संबंधित आधार प्रस्तुत किया जाए। कमेटी ने बिना पर्याप्त तथ्यात्मक आधार के उसके कामकाज पर आरोप लगाने और पूरी टेंडर प्रक्रिया रोकने की मांग से बचने की सलाह दी है। साथ ही प्रबंधन समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों से हाउस के निर्णयों, क्लब के संविधान तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप काम करने और विकास परियोजना के निष्पक्ष एवं समयबद्ध क्रियान्वयन में सहयोग करने की अपेक्षा जताई है।



