इंदौर। इंदौर की बदहाल यातायात व्यवस्था, जर्जर सड़कों और पूर्व में जारी न्यायालयीन आदेशों के पालन में कथित लापरवाही को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ में राजलक्ष्मी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ट्रैफिक सिग्नलों के बीच समन्वय की कमी, यातायात पुलिस बल के रिक्त पद, पार्किंग की अपर्याप्त व्यवस्था और खराब सड़कों सहित कई मुद्दे उठाए गए।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने यातायात पुलिस की कमी दूर करने के लिए शहर के करीब 40 प्रवेश मार्गों पर स्वचालित हाइड्रोलिक बैरियर लगाने का सुझाव दिया। वहीं, राजलक्ष्मी फाउंडेशन ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को यातायात सुधार और न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन के लिए एकल समन्वय एवं पर्यवेक्षण अधिकारी बनाए जाने तथा 21 दिनों में विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का प्रस्ताव रखा।
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92 सिग्नलों में से सिर्फ 28 ITMS से जुड़े
सुनवाई के दौरान बताया गया कि इंदौर में कुल 92 ट्रैफिक सिग्नल हैं। इनमें 58 स्मार्ट सिटी परियोजना और 34 नगर निगम के अधीन हैं। लेकिन इनमें से केवल 28 सिग्नल ही इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से जुड़े हैं। सिग्नलों के बीच समन्वय और सिंक्रोनाइजेशन की कमी के कारण वाहन चालकों को लगातार चौराहों पर रुकना पड़ता है। इससे जाम, ईंधन की बर्बादी और यात्रा में देरी की समस्या बढ़ती है। न्यायालय के समक्ष इस बात पर जोर दिया गया कि केवल सिग्नल स्थापित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी सिग्नलों का समन्वित संचालन भी जरूरी है, ताकि यातायात का प्रवाह सुचारु हो सके।
यातायात पुलिस के 221 पद खाली
शहर में यातायात पुलिस बल की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पूर्व की न्यायालयीन कार्यवाही में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, यातायात पुलिस के 881 स्वीकृत पदों के मुकाबले 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं। यानी 221 पद खाली हैं। इस कमी के कारण प्रमुख चौराहों, व्यस्त मार्गों और व्यापारिक क्षेत्रों में यातायात नियंत्रित करने में परेशानी होने की बात कही गई। संबंधित अधिकारियों से रिक्त पदों को भरने और भर्ती की प्रगति को लेकर अद्यतन स्थिति प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
40 प्रवेश मार्गों पर हाइड्रोलिक बैरियर का सुझाव
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने सुझाव दिया कि शहर के लगभग 40 प्रमुख प्रवेश मार्गों पर स्वचालित हाइड्रोलिक बैरियर लगाए जाएं। इससे भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और इन स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों को शहर के भीतर अन्य महत्वपूर्ण चौराहों और व्यस्त मार्गों पर लगाया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, इस व्यवस्था से लगभग 140 से 170 यातायात पुलिसकर्मियों को मुक्त कर शहर के भीतर तैनात करने की संभावना है। इसे नई भर्ती पूरी होने तक उपलब्ध पुलिस बल के बेहतर इस्तेमाल के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया।
311 एपर पर दर्ज शिकायतों का निराकरण भी जरूरी
सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों की मरम्मत में देरी का मुद्दा भी सुनवाई में उठा। नगर निगम की ओर से बताया गया कि उसके 311 ऐप पर नागरिक क्षतिग्रस्त सड़कों और गड्ढों की तस्वीरें अपलोड कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इस पर सवाल उठाया गया कि केवल शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराने से समस्या का समाधान नहीं हो जाता। जरूरी है कि शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और यह भी स्पष्ट किया जाए कि कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया तथा कितनी अब भी लंबित हैं।
विजय नगर से देवास नाका तक खराब सड़क
विजय नगर चौराहे से देवास नाका तक के मार्ग की खराब स्थिति का मुद्दा भी न्यायालय के समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण के कारण सड़क के मध्य हिस्से में खुदाई और बैरिकेडिंग की गई है, जबकि निर्माण कार्य अभी शुरुआती चरण में है। सड़क के किनारे के हिस्सों में गड्ढे, धूल, कंकड़-पत्थर और निर्माण मलबा होने से वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी और दुर्घटना का खतरा बढ़ने की बात कही गई। सुरक्षित और वाहन चलाने योग्य वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
इंदौर में सिर्फ 26 चिह्नित पार्किंग स्थल
शहर में पार्किंग सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठाए गए। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, इंदौर में 26 चिह्नित पार्किंग स्थल हैं, जबकि नागपुर में 51, कानपुर में 42 और लखनऊ में 62 पार्किंग स्थल बताए गए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं का अभाव सड़कों पर अवैध पार्किंग, यातायात अवरोध और जाम की समस्या को बढ़ाता है। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था का विस्तार और सड़कों से अतिक्रमण हटाना जरूरी है।
राहुल सेठी को समन्वय अधिकारी बनाने का प्रस्ताव
राजलक्ष्मी फाउंडेशन ने प्रस्ताव रखा कि अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को यातायात सुधार और पूर्व न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन के लिए एकल समन्वय एवं पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया जाए। प्रस्ताव के अनुसार, संबंधित विभाग अपनी प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से उनके समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि काम की स्थिति, लंबित कार्यों और आ रही बाधाओं की समीक्षा की जा सके। फाउंडेशन ने यह भी प्रस्तावित किया कि राहुल सेठी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर 21 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। इसमें ट्रैफिक सिग्नलों का एकीकरण, सड़कों की मरम्मत, पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग सुविधाओं का विस्तार और विभागीय जवाबदेही जैसे विषय शामिल हों।



