इंदौर। इंदौर के जूनी इंदौर क्षेत्र से जुड़े पुष्पलता मंगल मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने 13 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर प्रकरण को इसी स्तर पर समाप्त कर दिया। 85 वर्षीय पुष्पलता मंगल के स्वास्थ्य, देखरेख और निवास को लेकर आवेदन प्रस्तुत हुआ था। जांच, पक्षकारों के कथनों और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने फिलहाल कोई कार्यवाही शेष नहीं मानी। इस मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा ने सहानुभूति दिखाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
आखिर क्या है मामला?
पुष्पलता मंगल मामला माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत सामने आया। उपलब्ध आदेश के अनुसार आवेदक संजीव मंगल ने 85 वर्षीय पुष्पलता मंगल की देखरेख, चिकित्सा उपचार और संरक्षण को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने तथा आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग का उल्लेख है। मामले में अनावेदक अमित विदासरिया की ओर से जवाब भी प्रस्तुत किया गया। भारत में वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण के लिए 2007 का केंद्रीय कानून लागू है। इसमें भरण-पोषण, चिकित्सा सहायता और जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं।
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85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक की देखरेख पर क्या मिला?
आदेश में दर्ज तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित भवन करीब 30 से 40 वर्ष पुराना बताया गया। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि पुष्पलता मंगल प्रथम मंजिल पर रहती थीं और उनके पति धराकदास मंगल वृद्धावस्था में हैं तथा उस समय मेदांता अस्पताल में उपचाररत बताए गए। जांच के दौरान घर की स्थिति और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार देखभाल के लिए केयरटेकर की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन के सामने मुख्य प्रश्न यह था कि वरिष्ठ नागरिक की देखरेख किस व्यक्ति या संस्था के माध्यम से की जाए और उनकी इच्छा क्या है।
पुष्पलता मंगल की इच्छा को दिया महत्व
प्रकरण में पुलिस को भी जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया गया था। थाना प्रभारी की रिपोर्ट तथा तहसीलदार की जांच को रिकॉर्ड में शामिल किया गया।आदेश में यह उल्लेख है कि आवेदक और अनावेदक दोनों ही पुष्पलता मंगल की अभिरक्षा और देखरेख की बात कर रहे थे। इसलिए प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिक की इच्छा को महत्वपूर्ण माना। आदेश में यह भी दर्ज है कि पुष्पलता मंगल का उपचार मेदांता अस्पताल में पूरा हो चुका था। इसके बाद उनकी देखभाल के लिए केयरटेकर के माध्यम से व्यवस्था जारी रखने तथा आवश्यकता होने पर अपनी इच्छा के अनुसार अन्य केयरटेकर नियुक्त करने की स्वतंत्रता का उल्लेख किया गया।
आदेश का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष क्या है?
13 अगस्त 2026 के आदेश में उपलब्ध रिकॉर्ड, पुलिस रिपोर्ट, तहसीलदार की जांच और पक्षकारों के कथनों पर विचार करने के बाद प्रशासन ने माना कि इस स्तर पर कोई कार्यवाही शेष नहीं है। आदेश के अंत में प्रकरण को इसी स्तर पर समाप्त करने और रिकॉर्ड में दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि उपलब्ध आदेश में किसी पक्ष को संपत्ति का अंतिम मालिक घोषित करने या किसी पक्ष के पक्ष में स्थायी कब्जे का न्यायिक फैसला देने की बात नहीं है। आदेश का केंद्र वरिष्ठ नागरिक की वर्तमान देखभाल और प्रकरण में शेष प्रशासनिक कार्यवाही का आकलन है।



