इंदौर। नवभारत गृह निर्माण संस्था में लंबे समय से फर्जीवाड़ा चल रहा है। इस संस्था के करीब 800 लोग प्लॉट के लिए तरस रहे हैं, लेकिन संस्था ने 70 हजार वर्गफुट जमीन एक दूसरी संस्था को बेच दी। अब भूमाफिया इस जमीन को किसी भी तरह से निकालने में लगे हैं और मामला संयुक्त आयुक्त सहकारिता उज्जैन के पास है।
2004 में हार गई थी नवभारत
बताया जाता है कि नवभारत गृह निर्माण संस्था ने राधे राधे संस्था से 70 हजार वर्गफुट जमीन बेचने का अनुबंध कर लिया। इसके बाद अनुबंध विच्छेद हो गया। यह मामला भोपाल गया जहां 2004 में नवभारत संस्था को हार मिली।
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2014 में भी मिली हार
इसके बाद नवभारत संस्था ने संयुक्त आयुक्त के पास अपील की। वहां भी 2014 में संस्था हार गई। इसके बाद संस्था ट्रिब्यूनल में गई। ट्रिब्यूनल ने मामले को सुनवाई के लिए संयुक्त आयुक्त सहकारिता, उज्जैन के पास भेज दिया। अभी इस मामले में सुनवाई चल रही है और अगली तारीख 13 अगस्त लगी है।
सवाल यह है कि उज्जैन क्यों गया मामला
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह मामला उज्जैन क्यों गया? क्या इंदौर में इसकी सुनवाई नहीं हो सकती थी। सूत्र बताते हैं कि सहकारिता विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ ही इसमें कई भूमाफिया भी सक्रिय हैं। इसमें विभाग का एक पूर्व विवादित अधिकारी भी शामिल है।
800 सदस्य कर रहे प्लॉट का इंतजार
नवभारत गृह निर्माण संस्था के प्रशासक आशीष सेठिया हैं। उनके मुताबिक करीब 800 सदस्यों को अभी प्लॉट नहीं मिले हैं। इस तरह देखा जाए तो सदस्यों को प्लॉट मिले बिना ही संस्था की जमीन बेच देने में बड़ा खेल हुआ है।
उज्जैन की आड़ में हो रहा खेल
बताया जाता है कि भोपाल सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने दबाव बनाकर इस मामले को उज्जैन भिजवा दिया। हालांकि ट्रिब्यूनल का यह अधिकार है कि वह मामले को सुनवाई के लिए कहीं भी भेज सकता है, लेकिन नवभारत संस्था के लिए उज्जैन का ही दबाव बनाया गया।
नवभारत के पास हाईकोर्ट जाने का विकल्प
अगर उज्जैन में नवभारत संस्था की हार होती है तो उसके पास हाईकोर्ट जाने का विकल्प रहेगा। बताया जाता है कि विभागीय अनुमति लेकर प्रशासक और सहकारिता विभाग के अफसर 90 दिन में हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।
अपेक्स बैंक के एमडी गुप्ता के नाम की चर्चा
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में अपेक्स बैंक के एमडी मनोज गुप्ता का भी नाम सामने आ रहा है। वे पहले संयुक्त पंजीयक (न्यायिक), सहकारी संस्थाएं, इन्दौर संभाग थे। 2023 में उन्हें मप्र राज्य सहकारी बैंक, भोपाल (अपेक्स बैंक) में प्रतिनियुक्ति पर एमडी बनाकर भेजा गया था। इंदौर से जुड़े जमीन के कई मामलों में उनकी भूमिका सामने आ रही है।



