इंदौर। पार्षद जीतू यादव की एमआईसी में वापसी को लेकर कल यानी शनिवार को इंदौर में सुबह से लेकर रात तक ड्रामा चलता रहा। पार्षद कमलेश कालरा जहां प्रदेश संगठन के फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे, वहीं नगर अध्यक्ष दिन भर तरह-तरह की खबरें मीडिया तक पहुंचाते रहे। आखिर में डर की राजनीति की जीत हुई और कालरा का धरना खत्म हुआ।
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सीएम के कार्यक्रम में ही हो गया था फैसला
उल्लेखनीय है कि पिछले साल एमआईसी सदस्य जीतू यादव और पार्षद कमलेश कालरा के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। इस बीच पुलिस चालान में क्लिन चिट मिलने के बाद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हुई थी। फिर विधायक रमेश मेदोंला, विधायक गोलू शुक्ला सहित अन्य नेताओं ने जीतू यादव की एमआईसी में वापसी के प्रयास शुरू कर दिए थे। जब सीएम 11 सितंबर को इंदौर आए थे, तो रमेश मेंदला, गोलू शुक्ला सहित अन्य नेताओं ने उनसे इस मामले में चर्चा की। तभी जीतू की वापसी तय हो गई थी। सीएम के इशारे के बाद ये नेता भोपाल गए और वहां से फैसला हो गया।
आखिर किसके कहने से कालरा ने दिया धरना
प्रदेश संगठन के फैसले के नाराज पार्षद कमलेश कालरा शनिवार को अपने परिवार के साथ ऐतिहासिक राजबाड़ा पहुंचे और अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। कालरा के साथ उनकी पत्नी अरुणा, मां देवकी और बेटा भी मौजूद रहे। हाथों में न्याय की मांग वाली तख्तियां लेकर परिवार ने नियुक्ति के फैसले पर आपत्ति जताई। यहां सवाल यह उठता है कि आखिर किसके इशारे पर कालरा प्रदेश संगठन के फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए।
नगर अध्यक्ष दिन भर बनाते रहे डर का माहौल
इधर, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा दिन भर डर का माहौल बनाते रहे। वे मीडिया में इस तरह की खबरें फैलाते रहे कि अब विधानसभा चार के वीरेंद्र शेडगे, सोनू राठौर सहित कमलेश कालरा पर भी कार्रवाई होगी। यह मैसेज मालिनी गौड़ तक भी पहुंचाया गया कि इस विवाद में चार नंबर को ज्यादा नुकसान होगा। यह डर भी फैलाया कि जीतू यादव को भी एमआईसी से हटा देंगे। दावा किया गया कि आज चार विकेट जाएंगे।
नगर अध्यक्ष की भूमिका पर उठ रहे सवाल
भाजपा नेता इस पूरे प्रकरण में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। नेताओं का कहना है कि नगर अध्यक्ष अगर चाहते तो यह प्रकरण दिनभर नहीं चलता। कालरा के धरने की खबर मिलते ही उन्हें मालिनी गौड़ के यहां चला जाना चाहिए था और बात कर धरना खत्म कराना था, लेकिन वे दिन भर माहौल बनाते रहे।
अब खत्म नहीं होने वाला यह सिलसिला
नेताओं का कहना है कि नगर अध्यक्ष के रवैये के कारण ही भाजपा में इस तरह की स्थिति बनी है। कालिख कांड के बाद अगर कोई सख्त एक्शन ले लिया गया होता तो ऐसी नौबत नहीं आती। अब भाजपा का कोई भी नेता या कार्यकर्ता इस तरह के विरोध की हिम्मत दिखा देता है, क्योंकि उसे पता है कि संगठन के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने वाली।
पत्र जारी करने में भी होता रहा खेल
जब भोपाल से जीतू यादव की एमआईसी में शामिल किए जाने के निर्देश आ गए थे, तब भी पत्र जारी नहीं किया गया। महापौर पुष्य मित्र भार्गव और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने अपने करीबी मीडियाकर्मियों को सिर्फ यह पत्र जारी किया था। दोनों की कोशिश थी कि इस पर शहर में विवाद का माहौल बनता रहे।
रात 11.30 बजे राजवाड़ा पहुंचीं गौड़
दिनभर चले धरने के बाद रात करीब 11:30 बजे क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़ राजबाड़ा पहुंचीं। उन्होंने कमलेश कालरा से बातचीत की और उन्हें समझाया। इसके बाद कालरा ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। कहा तो यहां तक जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी मालिनी गौड़ की बात कराई गई थी।
इंदौर की गुटबाजी खुलकर सामने
इस पूरे घटनाक्रम से इंदौर भाजपा में चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। जीतू यादव की एमआईसी में वापसी नहीं होने के पीछे चार नंबर खेमा ही जोर लगा रहा था। इस बीच दो नंबर खेमे की लगातार कोशिश थी कि जीतू की वापसी कराई जाए। जब वापसी हो गई तो फिर चार नंबर खेमे ने ताकत दिखानी शुरू की, लेकिन नतीजा शून्य निकला।



