नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को केरल में थे। वहां उन्होंने मैरियन कॉलेज में छात्रों के साथ पुरानी मार्शल आर्ट कलारी में हाथ अजमाए। बाद में उन्होंने छात्र–छात्राओं से बात की। राहुल गांधी ने फिल्म, राजनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च शिक्षा पर अपनी बात रखी।
राहुल गांधी ने कलारी प्रैक्टिस से पहले किया जाने वाला पारंपरिक अभिवादन वंदनम किया, जिसमें प्रैक्टिस करने वाले ट्रेनिंग एरिया, गुरु और देवता को सम्मान देते हैं। राहुल गांधी आइकिडो में ट्रेंड हैं, जहां उन्होंने सालों की प्रैक्टिस के बाद ब्लैक बेल्ट हासिल की।. उन्होंने ब्राजीलियन जिउ–जित्सु की भी प्रैक्टिस की है, जिसमें तलवारबाजी की टेक्नीक शामिल हैं।
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मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय हालात पर जताई चिन्ता
राहुल गांधी ने शुक्रवार को मारियन कॉलेज के छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कई ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलताएं, भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में स्थिति, उच्च शिक्षा पर कथित वैचारिक हमले, मीडिया का हथियार के रूप में इस्तेमाल और राजनीति की प्रकृति जैसे मुद्दे शामिल थे। राहुल गांधी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, जमीन पर देखने पर यह अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच का संघर्ष है। अमेरिका महाशक्ति बने रहने का प्रयास कर रहा है, जबकि चीन धीरे–धीरे इसके करीब पहुंच रहा है।
भारत में ईंधन और महंगा होने जा रहा
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में ईंधन और महंगा होने जा रहा है। भारत में आर्थिक विकास धीमा होने जा रहा है। तो हमें इसको लेकर बहुत सावधान रहने की जरूरत है। इस तरह के संघर्षों के बढ़ने की आशंका है। भारत को समझना होगा कि हम एक हिंसक और खतरनाक समय में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए भारत की अपनी नीति स्पष्ट होनी चाहिए। इसलिए भारत को अपनी नीति और इस खतरनाक दौर से निपटने के तरीकों को लेकर स्पष्ट रहना होगा। चीन हमारी सीमा पर है और अमेरिका हमारा सहयोगी है। वे युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं। हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी कि हम अचानक इस संघर्ष में न फंस जाएं।
राजनीति करने के लिए थक्के खाने पड़ेंगे
राहुल गांधी ने आगे कहा कि अगर आप राजनेता बनना चाहते हैं, तो यह एक अप्रिय काम है। अगर आप इसे गंभीरता से करना चाहते हैं और आपके कुछ निश्चित मूल्य हैं, तो यह बहुत मुश्किल काम है। अगर आप सही मकसद से राजनीति में उतर रहे हैं, तो कष्ट सहने, मार खाने और धक्के खाने के लिए तैयार रहें। अगर आप गलत मकसद से राजनीति में उतर रहे हैं, तो यह आसान है। क्या मैं यह अपने लिए कर रहा हूं? क्या मैं यह अपने फायदे के लिए कर रहा हूं? तब आपके पास एक और रास्ता है?



